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Thursday, 21 August 2008
पुरूषों की लंबी उम्र के लिए बेहतर है एक से ज्यादा बीवियां!
शोधकर्ताओं के मुताबिक महिलाओं की लंबी उम्र का राज उनकी रजोनिवृत्ति में छुपा होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो मासिक धर्म खत्म हो जाने के बाद महिलाएं ज्यादा जीती हैं। रजोनिवृत्त महिलाओं की लंबी उम्र को लुम्मा 'दादी मां प्रभाव' बताती हैं। वह कहती हैं कि रजोनिवृत्ति के बाद कोई महिला दस साल जीती है तो उसे दो अतिरिक्त पोते-पोतियों को प्यार-दुलार करने का मौका मिलता है। शोध में महिलाओं की लंबी उम्र के पीछे पोते-पोतियों को दुलार करना तथा उनके नाज-नखरे सहने को एक बड़ा कारण बताया गया है। लेकिन पुरुषों का जीव विज्ञान महिलाओं से भिन्न होता है। वे 80 साल के बाद भी यौन क्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। ज्यादातर अनुसंधानकर्ता इसी बात को मर्दो की लंबी जिंदगी का राज बताते हैं।
वैज्ञानिकों ने दादी मां प्रभाव की तरह पुरुषों में 'दादा प्रभाव' का अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने 18वीं और 19वीं सदी के 25,000 फिनलैंडवासियोंके रिकार्ड खंगाले। इनमें से ज्यादातर लोग अपेक्षाकृत कम दिन जीवित पाए गए। यह वह दौर था जब लोग स्थान परिवर्तन कम करने के साथ परिवार नियोजन के तरीके भी नहीं अपनाते थे। चर्च की तरफ से एकपत्नी प्रथा कठोरता से लागू थी। पत्नी की मृत्यु के बाद ही पुरुष दूसरी शादी कर सकते थे।
Wednesday, 25 June 2008
जो पांचों सवालों के सही उत्तर देगा, उसी को वह अपना वर चुनेगी।
शादी तो हर किसी की होती है, लेकिन वह इस कलियुग में स्वयंवर के माध्यम से अपने लिए वर ढूंढ़कर एक अलग मिसाल पेश करना चाहती है। स्वयंवर रचाने का निर्णय उसका अपना है। वह कुछ ऐसा करना चाहती है, जिसे सारी दुनिया याद रखे। त्रेतायुग में जनकपुर की राजकुमारी सीता के स्वयंवर की तरह यह स्वयंवर भी अनोखा होगा, लेकिन इसमें धनुष तोड़ने जैसी विशेष कला का प्रदर्शन नहीं होगा। अन्नपूर्णा के स्वयंवर में सम्मिलित हुए वरों से पांच सवाल पूछे जाएंगे। यह सवाल अभी गुप्त रखे गए हैं। आयोजन के दिन ही इसे सामने लाया जाएगा, जो वर पांचों सवालों के सही उत्तर देगा, उसी को अन्नपूर्णा अपना वर चुनेगी।छत्तीसगढ़ में बालोद से 10 किमी दूर ग्राम घुमका में हल्बा समाज की, 13 सितंबर 1986 को जन्मी, अन्नपूर्णा के लिए स्वयंवर रचा जा रहा है। स्वयंवर समारोह में ऐसे वर सम्मिलित होंगे, जो अपने आपको अन्नपूर्णा के योग्य समझते हैं। स्वयंवर में भाग लेने वाले को पांच सवाल के जवाब तो देने ही होंगे, लेकिन इसके पहले उन्हें अपनी योग्यता का परिचय भी देना होगा। स्वयंवर की शर्त यह है कि युवक आदिवासी हल्बा समाज का ही हो। भंडारी गोत्र वाला युवक स्वयंवर में भाग नहीं ले सकेगा। वर की आयु कम से कम 22 और अधिकतम 26 वर्ष हो। स्वयंवर में बालोद, गुंडरदेही, लोहारा, गुरूर, धमतरी इन पांचों तहसील के ही युवक भाग लेंगे। स्वयंवर में भाग लेने के इच्छुक युवक 3 जुलाई तक ग्राम घुमका में आयोजक परिवार से संपर्क कर अपनी इच्छा व्यक्त कर सकते है।
अन्नपूर्णा के लिए योग्य वर का चुनाव स्वयंवर के माध्यम से हो,यह इच्छा माता पलटीन बाई और पिता रामरतन ठाकुर की भी थी। उनका परिवार रामचरित मानस कथा से काफी प्रभावित हैं, इसलिए वे भी इसका अनुकरण करते हुए सामान्य से हटकर कुछ अलग करने की चाह रखते हैं। पूरे गांव में उत्सवी माहौल होगा। स्वयंवर की खबर दूर-दूर तक पहुंच चुकी है। गली-गली में पंपलेट चिपकाया जा रहा है। लोगों में चर्चा होने लगी है। बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है। 8 जुलाई के दिन स्वयंवर आयोजित है। स्वयंवर समाप्ति के बाद सामाजिक रीति रिवाज एवं परंपरा अनुसार विवाह संपन्न कराया जायेगा।
(समाचार व चित्र दैनिक भास्कर से साभार)
Tuesday, 24 June 2008
प्यार और शादी की कोई उम्र नहीं
उज्जैन के शिवशक्तिनगर निवासी ८४ वर्षीय शंकरसिंह ने 57 वर्षीय विमलाबाई से शादी कर यह बात सिद्ध कर दी है कि प्यार और शादी की कोई उम्र नहीं होती है। ९ जून को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर यह वृद्ध युगत हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए। दोनों कई सालों से एकाकी जिंदगी जी रहे थे। अकेलेपन को दूर करने के लिए जीवन की सांझ में दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। दैनिक भास्कर में आयी ख़बर के अनुसार, शंकरसिंह और विमलाबाई दोनों का घर शिवशक्तिनगर में ही है। विमलाबाई के पहले पति संग्रामसिंह की मृत्यु १९९४ में हुई। वह तब से ही अकेली रह रही थी। शंकरसिंह की हालत भी ऐसी ही थी। उनकी पत्नी नर्मदाबाई की मृत्यु २००७ में हुई। दोनों की कोई संतान भी नहीं थी। शंकरसिंह एमपीईबी से रिटायर्ड हैं। दोनों का गुजारा शंकर की पेंशन से होगा।शंकरसिंह की पत्नी नर्मदाबाई अंतिम दिनों में बीमार रहती थीं। पड़ोस में रहने की वजह से विमलाबाई नर्मदाबाई की देख-रेख करने के लिए शंकरसिंह के घर आती-जाती थी। नर्मदाबाई की मृत्यु के बाद शंकरसिंह अकेले रह गए। दोनों में आपसी समझ अच्छी थी, अत: शादी का निर्णय कर लिया। ६ मई को वकील काजी अखलाक एहमद के माध्यम से एडीएम कोर्ट में शादी की अर्जी दी गई। वहां से ९ जून को दोनों की शादी मंजूर हुई। दोनों ने शपथ पत्र में जीवन के एकाकीपन को शादी की वजह बताया। उन्होंने बताया कि दोनों के जीवनसाथी अब इस दुनिया में नहीं है और कोई संतान भी नहीं है, अत: वे एक-दूसरे के साथ जीवन के अंतिम दिन गुजारना चाहते हैं।
Wednesday, 14 May 2008
शादीशुदा जिंदगी का मजा छीन लेते हैं बच्चे!
अपना परिवार बढ़ाना विवाहित जीवन का महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि बच्चे आने पर पति-पत्नी की जिंदगी और खुशहाल हो जाती है। लेकिन एक अध्ययन से इस पुरानी मान्यता के उलट निष्कर्ष मिल रहे हैं। एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि शादीशुदा जिंदगी में बच्चों की गैरमौजूदगी ही खुशहाली का सबब है और बच्चे होने पर सारी खुशियां हवा हो जाती हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. डेनियल गिलबर्ट का कहना है कि शादीशुदा जिंदगी का मजा तभी तक है जब तक पति-पत्नी के बीच बच्चा नहीं आता है। पति-पत्नी अपनी खुशी तभी जी पाते हैं जब बच्चे घर से बाहर जा चुके होते हैं।प्रो. गिलबर्ट का कहना है कि माता-पिता बच्चों पर वक्त और पैसे खर्च करते हैं। वे इसकी वापसी भी चाहते हैं। उनकी यह चाहत इस मान्यता की एक वजह बन जाती है कि बच्चे उनकी जिंदगी खुशगवार बनाते हैं। गिलबर्ट के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि शादीशुदा लोग अविवाहितों, तलाकशुदा और अकेले रह रहे लोगों की अपेक्षा ज्यादा सुखी रहते हैं। शादीशुदा लोग न केवल लंबी जिंदगी जीते हैं, बल्कि यौन सुख का लुत्फ कुंवारों की तुलना में ज्यादा उठाते हैं। साथ ही वे प्रति व्यक्ति आय की तुलना में ज्यादा पैसा कमाते हैं। लेकिन जैसे ही उनके बच्चे होते हैं, सारी खुशी गायब हो जाती है। प्रोफेसर के मुताबिक बच्चा होने के बारे में सोचना खुशी देता है, लेकिन जब बच्चे हो जाते हैं तो परेशानियां शुरू हो जाती हैं। आपके वैवाहिक सुख में खलल पड़ने लगता है। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब बच्चे किशोरावस्था में पहुंचते हैं। प्रो. गिलबर्ट ने खुशी और इसके कारण विषय पर एक सेमिनार में ये बातें कहीं हैं।
Friday, 11 April 2008
शादी में जाने से रोका: पति को पिटवा कर अस्पताल भिजवाया
एक रिश्तेदार की शादी में जाने से रोके जाने पर वह पति पर इतनी क्रोधित हो गई कि उसने बेचारे पति की जमकर पिटाई कर डाली। पिटाई भी इतनी ज्यादा कि पति महोदय को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अब वह अस्पताल में इलाज कराते हुए उस घड़ी को कोस रहा है जब उसने पत्नी को शादी में जाने से रोका था।मध्य प्रदेश में सीहोर जिले के कोडिया छीतू में रहने वाले जगदीश प्रसाद ने विगत दिवस अपनी पत्नी चंदाबाई और पुत्र प्रदीप को एक रिश्तेदार की शादी में जाने से रोक दिया था। इससे बुरी तरह नाराज चंदाबाई सीधे अपने मायके पहुंची और पति के खिलाफ जमकर लगाई-बुझाई की। इसपर चंदाबाई के पिता पूरन मालवीय तिलमिला उठे। वे अपने पुत्र, नाती और दो अन्य लोगों के साथ जगदीश के घर गए और सभी ने उसकी पिटाई कर दी, जिससे वह बेहोश हो गया।
पुलिस ने बताया कि जगदीश को सीहोर के एक अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस मामले में उसकी पत्नी, ससुर, साले और पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
Monday, 7 April 2008
पिछले तीन दशकों में पुरुषों का कार्यभार दोगुना हुया है!
अमेरिका में हाल ही में किए गए शोध के अनुसार घरेलू कामकाज में जहां महिलाओं के कार्यभार में तीस फीसदी गिरावट दर्ज की गई है वहीं पुरुषों पर काम का बोझ दोगुना बढ़ गया है। अमेरिका में हाल ही में किए गए एक अध्ययन में इसका खुलासा किया गया। अमेरिका में 1976 से 2005 के बीच किए गए अध्ययन में कहा गया है कि प्रति सप्ताह महिलाओं द्वारा घरेलू कामकाज किए जाने के घंटों में कमी हुई है जबकि पुरुषों में काम करने के घंटों में वृध्दि दर्ज की गई।
मिसिगन विश्वविद्यालय के शोधार्थियों द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि महिलाओं के काम के घंटे में भारी गिरावट दर्ज हुई। पहले जहां महिलाएं हफ्ते में 26 घंटे काम करती थी वहीं अब घटकर 17 घंटे पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर पुरुषों पर काम का भार छह घंटे से 13 घंटे की वृध्दि हुई है। अध्ययन में कहा गया है कि घरेलू कामकाज में भी महिलाओं का कार्यभार घटा है। इसमें कहा गया है कि शादी से पहले जहां पुरुष या महिलाओं को काम कम करना पड़ता है वहीं शादी के बाद कार्य अवधि में वृध्दि हो जाती है।
Saturday, 29 March 2008
नहीं भा रहा दांपत्य जीवन, नवविवाहितों को!
ब्रिटिश राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार शादी के एक दशक बाद तलाक का जोखिम कम हो जाता है और 31 फीसदी तलाक की घटनाएं शादी के दस साल बाद ही होती हैं, जबकि पंद्रह प्रतिशत घटनाएं शादी के बीस साल बाद होती हैं। कार्यालय ने यह आंकडे़ एक वेबसाईट पर आयी रिपोर्ट , जिसमें तलाक की दरों में रिकार्ड कमी बताई गई थी, के एक दिन बाद जारी किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 45 फीसदी शादियां अपनी शादी की 50वीं सालगिरह मनाने से पहले ही टूट जाती है तथा इनमें से आधी दस साल से पहले टूट जाती है।
पहले तलाक ले चुके और किशोरावस्था के लोगों में तलाक लेने की प्रवृत्ति ज्यादा है। सामाजिक नीति केंद्र के डान बाउचर ने कहा कि अगर सरकार शादी का पंजीकरण कर प्रणाली के तहत कर दिया जाए तो शादी के संबंध को टूटने से रोकने में मदद मिलेगी।
Thursday, 20 March 2008
यादें, याद आती हैं
एक साल से ज्यादा समय हो गया जब इयान और उनकी बीवी पांच साल साथ रहने के बाद अलग हुए। लेकिन वे मानते है कि आज भी उनकी जिंदगी की हर चीज, यहां तक कि फर्नीचर भी उन्हें उस रिश्ते की याद दिलाते हैं। इसलिए उन्होंने अपना सबकुछ ऑनलाइन सेल के लिए रख दिया है। इयान के शब्दों में, 'जिस दिन यह सब बिक जाएगा, मैं घर से सिर्फ एक पर्स और पासपोर्ट लेकर निकल जाऊंगा।'सेल में उनका पर्थ में स्थित तीन बेडरूम वाला घर और उसके भीतर रखी सारी चीजें यहां तक कि कार, मोटरसाइकल, जेट स्की और पैराशूटिंग गियर भी होगा। सेल के मुताबिक वे अपने दोस्तों से एक बार परिचय कराकर, अपने जॉब पर ट्रायल का मौका देकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करने दुनिया की सैर पर निकल जाएंगे, जिसमें इंग्लैंड में रह रही अपनी मां से मिलना भी शामिल है।
समाचार को यहाँ देखा जा सकता है। अगर आप भी बोली लगाना चाहते हैं तो उनकी वेबसाईट पर जाएँ.
Sunday, 20 January 2008
वश में हो, तो तलाक ले लेंगी ज्यादातर महिलाएं
शादीशुदा पुरुषों और महिलाओं पर सर्वे में 59 फीसदी महिलाओं ने कहा कि अगर भविष्य में आर्थिक सुरक्षा तय हो, तो तुरंत तलाक ले लेंगी। महिलाओं और पुरुषों दोनों में 10 में से एक का कहना था कि काश मैंने किसी और से शादी की होती। सर्वे के मुताबिक, आधे से ज्यादा पति अपनी शादीशुदा जिंदगी में प्यार का अभाव मानते हैं।
इस सर्वे में 2000 वयस्क ब्रिटिश शामिल किए गए। इनमें करीब 30 फीसदी ने अपनी शादी को नाकाम माना और कहा कि अचानक जिंदगी में उथल-पुथल से बचने के लिए शादी के बंधन को निभा रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों में करीब आधे ने कहा कि परिवार को बिखरने से बचाने के लिए हम साथ रह रहे हैं। 30 फीसदी पुरुषों का कहना था कि हम अपने बच्चों की खातिर साथ रह रहे हैं। 56 फीसदी लोगों ने माना कि अपने वैवाहिक रिश्तों से पूरी तरह खुश नहीं हैं। आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि हमने तलाक लेने पर विचार किया था।
Sunday, 13 January 2008
टीवी देखने से रोकने पर पिटे पतिदेव
मीरापुर बसहीं (शिवपुर), उत्तर प्रदेश में एक पति द्वारा अपनी पत्नी को टीवी देखने से रोकने पर ११ जनवरी की देर रात बवाल हो गया। बात इतनी बढ़ी कि पति घर छोड़कर भाग गया।
बताया जाता है कि पति पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है। वह शुक्रवार की रात तकरीबन बारह बजे घर आया। उस समय पत्नी टीवी देख रही थी। काफी रात होने के बाद पति ने कई बार कहा कि टीवी बंद कर दो। सुबह काम पर जाना है। पत्नी ने उसकी बातों को अनसुनी कर दिया। देर रात झल्लाए पति ने टीवी बंद कर दिया। मामला 'रात' में ही बिगड़ गया। टीवी बंद होते ही पत्नी ने आव देखा न ताव, एक थप्पड़ पति को जड़ दिया। इससे स्तब्ध पति ने भी अपना गुस्सा निकाला। इस पर आपे से बाहर हो चुकी पत्नी ने अपने मायके फोन कर सारी बात बताई। रातोरात मायके से एक दर्जन लोग आ गए।
बात बढ़ती देखकर पति घर से फरार हो गया। मामला रात में ही पुलिस के यहां पहुंच गया। मायकेवाले शनिवार को सवेरे अपनी बेटी को पहले पुलिस चौकी पर लाए और दहेज उत्पीड़न के संबंध में एक प्रार्थनापत्र दे दिया। फिर बेटी को लेकर मीरजापुर चले गये। युवती के मां-पिता का कहना है कि बेटी को सताया जा रहा है। पति पक्ष के अनुसार मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की शादी 26 अप्रैल 2007 को हुई थी।
Thursday, 13 December 2007
पत्नी कैसे बदलती है ...
पहले साल: मैंने कहा जी खाना खा लीजिए, आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं .
दूसरे साल: जी खाना तैयार है, लगा दूं ?
तीसरे साल: खाना बन चुका है, जब खाना हो तब बता देना.
चौथे साल: खाना बनाकर रख दिया है, मैं बाजार जा रही हूं, खुद ही निकालकर खा लेना.
पांचवे साल: मैं कहती हूं आज मुझसे खाना नहीं बनेगा, होटल से ले आओ.
छठे साल: जब देखो खाना, खाना और खाना, अभी सुबह ही तो खाया था ...
Monday, 10 December 2007
बदमिजाज पतियों की पिटाई का फतवा!
पूर्व प्रकाशित ब्लॉग
Saturday, 1 December 2007
टीवी शो गोरों को सिखा रहा अरेंज मैरिज के फायदे
ब्रिटेन का एक नया टीवी शो गोरे अंग्रेजों को बता रहा है कि किस तरह अरेंज मैरिज से उनकी जिंदगी की तमाम झंझटें खत्म हो जाएंगी।
अरेंज मी ए मैरिज शो की एंकर अनीला रहमान 30 साल आयुवर्ग के एकाकी लोगों को लंबे समय तक साथ निभाने वाला साथी खोजने के गुर सिखा रही हैं। एशिया मूल की स्काटलैंड की नागरिक अनीला की शादी 15 साल पहले पारंपरिक ढंग से हुई थी। वह खुद सुखी पारिवारिक जीवन बिता रही हैं।
झंझटों से छुटकारा पाने के लिए वह युवा अंग्रेजों को शराबखाने या डिस्कोबार के चक्कर काटने के प्रचलित नुस्खे बताने की जगह उन्हें अरेंज मैरिज की सलाह दे रही हैं। उनकी युवाओं को सलाह है कि अपना साथी चुनते वक्त उसकी पढ़ाई-लिखाई, पृष्ठभूमि और उसके परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करने पर ध्यान लगाएं।
39 साल की उम्र में भी चुलबुली नजर आने वाली अनीला ने इससे पहले किसी टीवी शो में काम नहीं किया है। उन्होंने बताया कि शो का मकसद लोगों को खुशी देना ही नहीं है, बल्कि ब्रिटेन में एक दूसरी संस्कृतियों को जानने की संस्कृति विकसित करना भी है। अनीला के जीवनसाथी स्काटलैंड से पाकिस्तान चले गए हैं। वह बताती हैं, यह तो जिंदगी का हिस्सा है। हम जिस एशियाई संस्कृति में पले बढ़े हैं यह उसका हिस्सा है। यह ऐसी चीज है जिसके बारे में अक्सर चर्चा होती रहती है।
पारंपरिक शादी ब्रिटेन में विवाद का मुद्दा रहा है। पांच साल पहले कैबिनेट मंत्री डेविड ब्लंकेट ने सुझाव दिया था कि एशियाई परिवार ब्रिटेन के भीतर ही जीवनसाथी खोजें और वर-वधू की खोज में विदेश न जाएं। इस बयान पर काफी हाय तौबा मची थी।
Thursday, 29 November 2007
फतवा : पति को पीट सकती हैं महिलायें !
एपी की खबर के अनुसार, आयतुल्लाह मोहम्मद हुसैन फदल्लाह ने ये फतवा (या आदेश) महिलाओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर दिया।
फदल्लाह ने अपने फतवे में कहा, “हमारा विचार है कि अगर एक पुरुष महिला के खिलाफ शारीरिक हिंसा करता है, और महिला जवाबी हमला किए बिना अपना बचाव नहीं कर सकती तो वह आत्मरक्षा में ऎसा कर सकती है।”
फदल्लाह ने अपने कार्यालय से जारी एक बयान में जोर देकर कहा है कि यद्यपि इस्लाम पुरुषों को अपने घरेलू मामलों में पत्नियों पर वरीयता देता है लेकिन “यह किसी भी हालत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा- यहां तक की बेइज्जती करने और उन्हें अपशब्द कहने की भी इजाजत नहीं देता। ”
लेबनान में शिया आबादी 12 लाख हैं और उनमें फदल्लाह को धार्मिक मामलों में उच्च स्थान हासिल है। उनके अनुयायी पूरे मध्य- पूर्व इलाके में हैं। पश्चिम उन्हें उनके हिज्बुल्लाह के साथ पूर्व में रहे रिश्तों की वजह से चरमपंथी मानता है। जबकि उन्होंने कई बार कई मुद्दों पर प्रगतिशील और अहिंसा का उदाहरण दिया है जिसकी वजह से उनके कुछ रुढ़िवादी समर्थक अचंभित हो जाते हैं।
फदल्लाह ने कुछ रुढ़िवादी मुस्लिम समाज में व्यभिचार के लिए महिला को जान से मारने की परंपरा की आलोचना की है। उन्होंने ये भी कहा है कि अगर एक आदमी किसी महिला के कानूनी और वैवाहिक अधिकारों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लेता है; जैसे कि वह घर में होनेवाले खर्चे में कटौती करता है,या फिर उससे शारीरिक संबंध रखने से बचता है, ऐसे में “उसके जवाब में पत्नी शादी के अनुबंध में किए गए करार से उसे वंचित कर सकती है। ”
फदल्लाह ने कहा कि पूरे संसार में औरतों को हिंसा का निशाना बनाया जाता है जबकि, “ महिलायें सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर सरकारी और गैर-सरकारी दोनों स्थानों पर बड़े ओहदों पर पहुंच चुकी हैं। ”
उन्होंने जोर देकर कहा कि काम के स्थानों पर और परिवार में महिलाओं के अधिकारों का आदर करना चाहिए।
Monday, 26 November 2007
आलू की EMI , जिन्न और अलादीन
आलू के भाव जहां जा चुके थे, उनकी ईएमआई चुकाना अलादीन के बूते के बाहर की बात थी। अलादीन हैरान-परेशान बैठा था कि एक बोतल में जिन्न जैसा कुछ दिखाई दिया। जिन्न ने पूछा- प्यारे अलादीन, शादी के बाद यूं तो सब परेशान रहते हैं, पर तेरी परेशानी कुछ ज्यादा वोल्टेज की लग रही है, क्या सेंसेक्स डूबने से तू व्यथित है? सेंसेक्स डूबने के बाद कई बंदे इधर डूबने आते हैं, पर अब यहां पानी नहीं बचा है। डूबने वाले पत्थर से टकरा जाते हैं, हाथ-पैर तुड़वा बैठते हैं। घर वाले डांटते हैं कि अगर मरना ही है, तो किसी मकान का लोन लेकर किसी बैंक के गुंडों के हाथों मरो ताकि कुछेक लाख का मुआवजा कोर्ट दिलवा दे। इतना शर्मदार तू है नहीं कि चुल्लू भर पानी में डूब जाए। वैसे जो शख्स आलू की ईएमआई अफोर्ड न कर पाए, उसे डूब मरना चाहिए पर चुल्लू भर पीने का पानी भी उस भाव होने लगा है कि उसकी ईएमआई भी तू अफोर्ड ना कर सकता।
खैर, बता तेरे लिए कोई हूर का जुगाड़मेंट करूं। मेरे पास हूरों को बुलाने की पावर है।
अलादीन हूरों का नाम सुनकर डर गया और पूछने लगा- ओफ्फो तो हूरों भी आलू खाएंगी। उनके आलुओं का पैसा कहां से आएगा। अबे जिन्न, हूर-शूर तलाशने के दिन गए। यह बता कि आलू का जुगाड़ तू कर सकता है क्या। जिन्न हंसने लगा और बोला- बेट्टा अब आलुओं की ईएमआई अफोर्ड करना अगर मेरे बूते में होता, तो काहे को डर कर मैं इस बोतल में रहता। घर जाते हुए शर्म आती है कि आलू तक अफोर्ड नहीं कर सकता। सो अब बोतल में रहता हूं। लेटेस्ट खबर यह है कि जिन्न को बोतल से निकालने की बजाय अलादीन खुद भी बोतल में घुसकर रहने का प्रयास कर रहा है।
-आलोक पुराणिक का लेखांश, नवभारत टाइम्स से साभार
Saturday, 24 November 2007
मैं इस घर को आग लगा दूंगा ...
बिल्डर गैरी हूली अपनी पत्नी मिशेल से गुस्से में यह बात पहले भी कई बार कह चुका था। पुलिस को वह अपनी वैन में सोया हुआ मिला। हालांकि उसका कहना है कि यह काम उसका नहीं है। लेकिन उसका भरोसा किसी को नहीं। उसने उस रात काफी बियर पी थी।
नवभारत टाइम्स की खबर है कि घटना की रात दोनों मिशेल की एक सहेली के यहां पार्टी में गए थे। वहां भी गैरी काफी खराब मूड में था। मिशेल डांस करने गई। उसे अपने पर्स का ख्याल रखने को कहा तो वह नाराज हो गया। हालांकि बाद में दोनों ने साथ डांस किया तो उसका गुस्सा कुछ कम हुआ था। लेकिन बाद में फिर झगड़ा हो गया।
झगड़े की वजह से रात को मिशेल घर भी नहीं लौटी। अपनी सहेली के घर ही रुक गई। सुबह पुलिस से ही सूचना मिली कि उसके घर में आग लग गई है। उसके सारे कपड़े और दूसरा सामान भी जल गया।
50 वर्षीय हूली ने कुछ दिन पहले ही अपने बंगले का साज सज्जा करवाई थी। बंगला मिशेल के नाम में था। पहली शादी से मिले इस बंगले के बीमे की किस्तें भी वही दे रही थी। महंगे जेवरात और 70 जोड़े जूतों का भी बीमा कराया हुआ था।
गैरी और मिशेल बचपन से एक दूसरे को जानते थे। शादी से पहले 2 साल तक इश्क चला था। लेकिन शादी होते ही इश्क हवा हो गया। पिछली जुलाई से कई बार दोनों ने अदालत के कहने पर साथ रहने की कोशिश की। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। लगता है यह समस्या सर्वव्यापी है.
