अपना परिवार बढ़ाना विवाहित जीवन का महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि बच्चे आने पर पति-पत्नी की जिंदगी और खुशहाल हो जाती है। लेकिन एक अध्ययन से इस पुरानी मान्यता के उलट निष्कर्ष मिल रहे हैं। एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि शादीशुदा जिंदगी में बच्चों की गैरमौजूदगी ही खुशहाली का सबब है और बच्चे होने पर सारी खुशियां हवा हो जाती हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. डेनियल गिलबर्ट का कहना है कि शादीशुदा जिंदगी का मजा तभी तक है जब तक पति-पत्नी के बीच बच्चा नहीं आता है। पति-पत्नी अपनी खुशी तभी जी पाते हैं जब बच्चे घर से बाहर जा चुके होते हैं।
प्रो. गिलबर्ट का कहना है कि माता-पिता बच्चों पर वक्त और पैसे खर्च करते हैं। वे इसकी वापसी भी चाहते हैं। उनकी यह चाहत इस मान्यता की एक वजह बन जाती है कि बच्चे उनकी जिंदगी खुशगवार बनाते हैं। गिलबर्ट के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि शादीशुदा लोग अविवाहितों, तलाकशुदा और अकेले रह रहे लोगों की अपेक्षा ज्यादा सुखी रहते हैं। शादीशुदा लोग न केवल लंबी जिंदगी जीते हैं, बल्कि यौन सुख का लुत्फ कुंवारों की तुलना में ज्यादा उठाते हैं। साथ ही वे प्रति व्यक्ति आय की तुलना में ज्यादा पैसा कमाते हैं। लेकिन जैसे ही उनके बच्चे होते हैं, सारी खुशी गायब हो जाती है। प्रोफेसर के मुताबिक बच्चा होने के बारे में सोचना खुशी देता है, लेकिन जब बच्चे हो जाते हैं तो परेशानियां शुरू हो जाती हैं। आपके वैवाहिक सुख में खलल पड़ने लगता है। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब बच्चे किशोरावस्था में पहुंचते हैं। प्रो. गिलबर्ट ने खुशी और इसके कारण विषय पर एक सेमिनार में ये बातें कहीं हैं।
Wednesday, 14 May, 2008
शादीशुदा जिंदगी का मजा छीन लेते हैं बच्चे!
पतियों के हाथों महिलायें क्यों पिटती हैं? सरकार भी जानना चाहती है
आख़िर सरकार ने मान लिया है कि राष्ट्रीय महिला आयोग, महिलाओं पर लगातार बढ़ रहे जुल्म-ओ-सितम को रोकने में बहुत कारगर भूमिका निभा पाने में नाकाम रहा है। अब, राष्ट्रीय महिला आयोग को सरकार और अधिकार संपन्न बनाएगी। इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। साथ ही महिलाओं पर जुल्म की मूल वजहों को जानने और उनके प्रति पुरुषों के नजरिये में बदलाव लाने के मद्देनजर सरकार जल्द ही एक गोलमेज सम्मेलन भी करेगी। इसमें पत्नी पीड़ित पतियों की भी बातें सुनी जाएंगी।
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री [स्वतंत्र प्रभार] रेणुका चौधरी ने पिछले दिनों राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में सदन को यह जानकारी दी। एक सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि महिलाओं को लेकर पुरुषों की भी अपनी समस्याएं हैं। साथ ही उनकी सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। इसके बगैर सकारात्मक नतीजे नहीं आ सकते। लिहाजा उनका मंत्रालय एक गोलमेज सम्मेलन कराने की तैयारी कर रहा है। सम्मेलन में महिलाओं के साथ पत्नी पीड़ित पतियों, सामाजिक मनोविज्ञानियों और दूसरे प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। मकसद यह भी जानने का है कि पतियों के हाथ महिलाओं की पिटाई की आखिर मूल वजहें क्या हैं?
Tuesday, 13 May, 2008
पति के बदले चोर घर में घुसा, पत्नी उसके साथ घंटों ...
रात के अंधेरे में ऐसा धोखा किसी के साथ न हो। मलेशिया की एक महिला अपने पति के धोखे में घर में घुसे चोर के साथ ही कई घंटे सोती रही। आधी रात को जब उस महिला को पता चला कि उसके साथ सोया व्यक्ति उसका पति नहीं है तो उसके होश उड़ गए।
मलेशियाई समाचार पत्र द स्टार में प्रकाशित एक खबर के अनुसार यह घटना यहां के पूर्वी प्रांत तेरेंगगानू में घटी। रात के वक्त एक 36 वर्षीय महिला अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी। इस बीच उसके घर में एक चोर घुस आया। चोर महिला के पति को दूसरे कमरे में गहरी नींद में सोते देख अपने कपड़े उतारकर महिला के बिस्तर में घुस गया।
महिला को हकीकत का पता तब चला जब उसने अपने पति से कुछ पूछा। जवाब में, चोर की आवाज सुनकर उसका माथा ठनका। महिला को यह आवाज अपने पति की आवाज से कुछ अलग लगी। महिला बिस्तर से उठकर चुपके से दूसरे कमरे में गई तो उसने वहां अपने पति को गहरी नींद में सोते पाया। यह देखकर महिला जोर से चिल्लाई। इस शोर से हड़बड़ाकर चोर अपने कपड़े-लत्ते वहीं छोड़कर कुछ कीमती सामान के साथ खिड़की से कूदकर फरार हो गया।
Tuesday, 22 April, 2008
शराब के नशे में महिला ने की पति की हत्या
झारखंड में एक महिला रात के भोजन संबंधी पति की शिकायत पर आगबबुला हो गई और शराब के नशे में उसकी हत्या कर बैठी। पुलिस ने रविवार को जानकारी दी थी कि रांची के पास स्थित हरबुल गांव में चामनी नामक महिला ने अपनी पति बुरान मुंडा की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। घटना से पहले दोनों ने साथ मिल कर शराब पी थी। नोमकोम पुलिस स्टेशन के प्रभारी रविकांत कुमार ने कहा, ''दोनों के बीच शुक्रवार शाम कहा सुनी हुई थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर शराब पी थी। रात में खाते समय जब बुरान ने भोजन के बासी होने की शिकायत की तो चामनी ने कुल्हाड़ी से प्रहार कर उसकी हत्या कर दी।''
घटना के बाद चामनी ने गांववालों को बुरान के मारे जाने की सूचना दी लेकिन नशे में होने की वजह से पति की हत्या किए जाने से इंकार करती रही। हालांकि बाद में पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया । फिलहाल उसे जेल भेज दिया गया है। चामनी के कुल चार बच्चे हैं जो इस घटना के प्रत्यक्ष गवाह हैं।
Friday, 11 April, 2008
शादी में जाने से रोका: पति को पिटवा कर अस्पताल भिजवाया
एक रिश्तेदार की शादी में जाने से रोके जाने पर वह पति पर इतनी क्रोधित हो गई कि उसने बेचारे पति की जमकर पिटाई कर डाली। पिटाई भी इतनी ज्यादा कि पति महोदय को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अब वह अस्पताल में इलाज कराते हुए उस घड़ी को कोस रहा है जब उसने पत्नी को शादी में जाने से रोका था।
मध्य प्रदेश में सीहोर जिले के कोडिया छीतू में रहने वाले जगदीश प्रसाद ने विगत दिवस अपनी पत्नी चंदाबाई और पुत्र प्रदीप को एक रिश्तेदार की शादी में जाने से रोक दिया था। इससे बुरी तरह नाराज चंदाबाई सीधे अपने मायके पहुंची और पति के खिलाफ जमकर लगाई-बुझाई की। इसपर चंदाबाई के पिता पूरन मालवीय तिलमिला उठे। वे अपने पुत्र, नाती और दो अन्य लोगों के साथ जगदीश के घर गए और सभी ने उसकी पिटाई कर दी, जिससे वह बेहोश हो गया।
पुलिस ने बताया कि जगदीश को सीहोर के एक अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस मामले में उसकी पत्नी, ससुर, साले और पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
पाकिस्तान में तलाक लेने में महिलाएं आगे
पाकिस्तान में इन दिनों परिवार अदालतों के बाहर तलाक लेने वालों की कतार लंबी ही होती जा रही है। तलाक के कारण भी ऐसे-ऐसे बताए जा रहे हैं, जो हैरान करने वाले हैं। रावलपिंडी की 33 परिवार अदालतों में इस साल करीब डेढ़ हजार लोग तलाक की अर्जी दे चुके हैं। इनमें से 270 को तलाक मिल भी चुका है। 778 अर्जियों पर फैसला आना बाकी है।
तलाक के कारणों पर गौर करें तो दहेज की मांग और ससुराल पक्ष द्वारा बदसलूकी सबसे आम कारण हैं। पर कुछ अजीबोगरीब कारण भी बताए गए हैं, जैसे- सेलफोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल या कंप्यूटर पर काम करने की मनाही आदि। खास बात यह है कि तलाक मांगने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
दैनिक जागरण के एक समाचार में बताया गया है कि शादी के तीन महीने बाद ही तलाक की अर्जी दायर कर चुकी एक लड़की लगातार की जा रही दहेज की मांग को रिश्ते टूटने का एक प्रमुख कारण बताती है। 300 महिलाओं ने जहां अपने पति द्वारा दूसरी शादी की इच्छा को तलाक का कारण बताया है, वहीं 150 महिलाओं ने अपनी सास के दुर्व्यवहार को। कुछ महिलाओं ने अपनी आर्थिक परेशानियों के मद्देनजर तलाक मांगा है। सौ से ज्यादा महिलाओं द्वारा दायर तलाक के आवेदनों में कहा गया है कि उनके शौहर के पास नौकरी नहीं है, इसलिए वह उनके साथ नहीं रह सकतीं। कुछ ने तो यह कहा है कि उनका पति उनके साथ वक्त नहीं बिताता और रात भर किसी अजनबी से मोबाइल पर बात करता रहता है। और तो और 23 जोड़ों ने तो सिर्फ इसलिए तलाक मांगा है, क्योंकि उनकी जोड़ी बेमेल है।
Thursday, 10 April, 2008
पति बढा़ते हैं, पत्नियों का काम
अगर आप सोचते हैं कि पतियों के कारण पत्नियों पर काम का बोझ बढ़ जाता है, या उन्हें घर में अधिक समय तक काम करना पड़ता है तो आप सही सोचते हैं। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई है। शोध में इस बात का खुलासा किया गया है कि शादीशुदा महिलाओं को अपने पतियों के कारण सप्ताह में औसतन सात घंटे घर का काम करना पड़ता है।
यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट फॉर सोशल रिसर्च (आईएसआर) विभाग के फ्रैंक स्टेफोर्ड ने कहा कि यह एक जाहिर सी बात है कि शादी के बाद बच्चे होने तक पुरुष बाहर के काम ज्यादा संभालते हैं, जबकि महिलाएं घर का काम संभालती हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए स्थिति उस समय और बुरी हो जाती है जब उनके बच्चे हो जाते हैं।
स्टेफोर्ड की अध्यक्षता में किया गया शोध वर्ष 2005 की टाइम-डायरी आंकड़ों पर आधारित हैं। ये आंकड़े इंस्टिट्यूट फॉर सोशल रिसर्च विभाग में वर्ष 1968 से किए गए अध्ययन से जुटाए गए। बहरहाल, शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने के लिए डायरियों का अध्ययन किया कि लोग किस तरह अपना समय व्यतीत करते हैं। शोधकर्ताओं ने पुरुषों और महिलाओं से यह सवाल किया कि वे खाना बनाने, साफ-सफाई और घर के आस-पास कुछ अन्य काम पर कितना समय बिताते हैं।
अब भी दिल न भरा हो तो बाक़ी रिपोर्ट भी देख ही लें।
