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Wednesday, 5 November 2008

बीबी के चेहरे पर इतने मुहाँसे, कि पति ने तलाक ले लिया

मुंबई में एक पति को अपनी बीवी के चेहरे के मुँहासों से इतनी नफरत हुई कि उसने पत्नी से ही तलाक ले लिया। भले ही उसे हर्जाने के तौर पर ढाई लाख रुपये चुकाने पड़े। हुया यह कि सीमा (बदला हुआ नाम) के पति ने कोर्ट में अर्जी दायर कर कहा कि उसकी पत्नी के चेहरे पर मुँहासों के दाग हैं। इन दागों की वजह से वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून का आनंद नहीं ले सका। अश्विन ने कहा कि उसकी पत्नी को यह त्वचा संबंधी बीमारी बचपन से थी, लेकिन शादी के समय ससुरालवालों ने इस बात को छुपाया।

हनीमून के बाद सीमा से कहा गया कि तुम अपने मायके जाकर अपने डॉक्टर की सलाह ले। इसके एक महीने बाद सीमा अपने मायके लौट गई। उस वक्त पति ने उसे विश्वास दिलाया था कि जब वह ठीक हो जाएगी, तो वह उसे फिर उसे बुला लेगा। मई 1998 में सीमा ने अपने पति को फोन किया और धमकी दी कि अगर उसने उसे अपने पास नहीं बुलाया तो वह खुदकुशी कर लेगी। इसी बीच सीमा ने थाने में जाकर ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया। जब मामला मुंबई की पारिवारिक अदालत पहुंचा तो अदालत ने सीमा के डॉक्टर को अदालत में पेश होने के लिए कहा। सीमा के डॉक्टर ने कहा कि इस बीमारी का उपचार है और यह ठीक हो सकती है। साथ ही उसने कोर्ट से कहा कि इसके चलते शारीरिक सम्बन्ध बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। पर अदालत ने डॉक्टर की दलील को नकार दिया।

6 साल तक कोर्ट में मामला चलने के बाद दोनों पक्ष तलाक के लिए तैयार हो गए। सीमा को अपने पति के खिलाफ कोर्ट में दायर सभी केस को वापस लेने के लिए 2.50 लाख रुपये हर्जाना भी दिया गया।

Sunday, 19 October 2008

शेयर बाजार में 30 लाख रुपए लुटा बैठी, पति ने तलाक देने का फैसला लिया

एक महिला को उसके पति ने तलाक देने का इसलिए फैसला कर लिया क्योंकि वह शेयर बाजार में 30 लाख रुपए लुटा बैठी। लगता है कि आर्थिक मंदी की छाया शेयर बाजार से निकलकर घर की चारदीवारी में पसर गई है। अहमदाबाद के मनोविज्ञानी डॉ . हंसल भचेच की ऑनलाइन कंसल्टेंसी में इस महिला ने अपना दिल का हाल बयां किया है। वह एक गृहणी है और खाली समय में शेयर ट्रेडिंग किया करती है। उसने बिना अपना नाम बताए लिखा है , ' मैं 34 साल की हूं और मेरी शादी को 10 साल हुए हैं। मेरी एक बेटी है जो अब बड़ी हो गई है। इसीलिए मेरे पास अब इतना समय होता है कि मैं घर बैठे कुछ काम कर सकूं। शेयर मार्केट में पैसा लगाना मुझे सबसे मुफीद लगा , सो मैं यह काम करने लगी। '

महिला आगे लिखती है , ' जब मुझे मुनाफा हुआ तो मेरे पति को भी यह बहुत अच्छा लगा। एक समय ऐसा भी था कि हमारे परिवार पर रुपयों की बरसात हुई। सारे सपने पूरे हो जाएंगे , ऐसा लगा। पर हाल के दिनों में जब शेयर मार्केट बुरी तरह गिरे , तो मुझे बहुत नुकसान हुआ। मेरे पति बहुत नाराज हुए। उन्होंने साफ कह दिया कि वह इस घाटे को नहीं उठा सकते। उन्होंने मुझे तलाक देने की धमकी भी दी है। ' डॉ . भचेच से राय मांगते हुए उस महिला ने पूछा है कि शेयर मार्केट की इस स्थिति के लिए सरकार क्या करने वाली है ?' वैसे अहमदाबाद की बहुत सी घरेलू महिलाओं ने पिछले कुछ हफ्तों में स्टॉक्स में बड़ी रकम गंवाई है। यह बात अलग है कि यह अपनी तरह का मामला है पर इसमें कोई शक नहीं कि बहुत सी महिलाएं इस समय दोहरे दर्द को झेल रही हैं। पैसे गंवाने के साथ - साथ उन्हें परिवार से भी ताने सुनने को मिल रहे हैं ,' डॉ . भचेच यह कहते हैं।
(ख़बर, विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा)

Wednesday, 3 September 2008

शादी टूटने का कारण किसी की बेवफाई या अड़ियलपन नहीं, बल्कि खास जीन

शादी टूटना गंभीर समस्या है। मियां-बीवी के बीच व्यवहार संबंधी कई कारणों को इसका जिम्मेदार बताया जाता है। लेकिन स्वीडन के शोधकर्ताओं की मानें तो शादी टूटने का कारण किसी एक की बेवफाई या अड़ियलपन नहीं बल्कि खास जींन होते है। ये जीन पुरुष और महिला के जुड़ाव में भी अहम भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिकों ने तलाक और पुरुषों में मिलने वाले एक जीन के बीच एक खास संबंध देखा है। अब बहुत मुमकिन है कि कुछ समय बाद तलाक के मसले सुलझाने के लिए दंपती काउंसिलर की जगह जिनेटिक क्लीनिक की राह पकड़ने लगें।

कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट, स्टॉकहोम के हसी वैलम और उनके सहयोगियों का कहना है कि किसी भी रिश्ते में समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं। वैलम भी जोर देकर कहते हैं कि महज़ जीन के आधार पर किसी पुरुष के व्यवहार का आकलन करना ठीक नहीं होगा। लेकिन वह यह भी कहते हैं कि इस जीन में इसी तरह के असर से हमारे शोध को काफी बल मिलता है। फिर भी इस शोध से इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि वैज्ञानिक एक दिन ऐसी दवाएं बना सकेंगे जो इस जीन पर असर करके शादियों को टूटने से बचा सकें।

Monday, 30 June 2008

तलाक के बाद, आखिरकार 1 करोड़ 63 लाख रूपयों में बिक गया वो

पत्नी से तलाक के बाद ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेट के जरिये अपने घर, नौकरी और अपने मित्रों से मुलाकात के मौके सहित अपना जीवन बेच रहे इयान ने कहा कि उसने अपने जीवन को 399 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (383.23 हजार अमेरिकी डॉलर या 1,63,68,039 भारतीय रूपयों) में इसे बेचा है।

ब्रिटेन में पैदा हुए इयान अशर (44) ने पश्चिमी शहर पर्थ में अपना घर, कार, मोटरसाइकिल, जेट स्की और अपना अन्य सामान बेचने का फैसला किया। लाइफ पैकेज में न सिर्फ कपड़ों और डीवीडी जैसे संग्रह शामिल था बल्कि कारपेट सेल्समैन की उसकी पुरानी नौकरी और उसके कुछ मित्रों से मुलाकात का मौका भी शामिल था। इंटरनेट नीलामी साइट इबे पर सात दिन चली बिक्री के बाद अशर ने कहा, 'अंतिम कीमत 399 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रही। यह पूछने पर कि कीमत के बारे में वह क्या महसूस करता है उसने कहा कि यह काफी अच्छी है।

इयान के अन्तिम संदेश, सहित अन्य ब्लॉग संदेश यहाँ देखे जा सकते हैं।

Friday, 23 May 2008

पत्नी ने जींस नहीं पहनी, पति ने तलाक का नोटिस दिया

भारतीय युवा वर्ग पाश्चात्य संस्कृति की गिरफ्त में इस कदर आ गया है कि आज उसे ज़रा सी बात पर सात फेरों का बंधन तोड़ने में जरा सी भी हिचक नहीं होती। एक युवक ने अपनी पत्नी को महज इसलिए तलाक देने का फैसला कर लिया क्योंकि वह जींस अन्य पश्चिमी पहनावा पहनने से इनकार कर रही थी। वह तो भला हो अदालत का, जिसने दोनों को ढेरों नसीहतें देकर सुलह के लिए मामले को मध्यस्थता केंद्र के पास भेज दिया। राष्ट्रीय सहारा का समाचार है कि पूनम व पवन (बदले हुए नाम) ने तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था लेकिन शादी के बाद दोनों के बीच पहनावे को लेकर विवाद शुरू हो गया। पवन अपनी पत्नी को जींस व अन्य पश्चिमी पहनावा पहनने के लिए जिद करने लगा लेकिन पूनम ने इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और पूनम अपने मायके चली गई। करीब तीन महीने पहले पूनम को एक नोटिस मिला, जिसमें उसके पति ने तलाक के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की थी।

पूनम ने कहा कि तलाक के लिए जो आरोप लगाए गए हैं, वे आधारहीन हैं। उसे यह अधिकार है कि वह किस तरह के कपड़े पहने। उसने यह भी कहा कि यदि इस बात के लिए पवन उसे तलाक देना चाहता है तो इसका मतलब यह है कि उसके पति के दिल में उसके ’प्रेम’ की कोई अहमियत नहीं है। इस मामले में अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पति–पत्नी दोनों को आपस में सुलह करने को कहा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को नसीहत देते हुए मामला मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया। यहां पर दोनों में सुलह कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Friday, 11 April 2008

पाकिस्तान में तलाक लेने में महिलाएं आगे

पाकिस्तान में इन दिनों परिवार अदालतों के बाहर तलाक लेने वालों की कतार लंबी ही होती जा रही है। तलाक के कारण भी ऐसे-ऐसे बताए जा रहे हैं, जो हैरान करने वाले हैं। रावलपिंडी की 33 परिवार अदालतों में इस साल करीब डेढ़ हजार लोग तलाक की अर्जी दे चुके हैं। इनमें से 270 को तलाक मिल भी चुका है। 778 अर्जियों पर फैसला आना बाकी है।

तलाक के कारणों पर गौर करें तो दहेज की मांग और ससुराल पक्ष द्वारा बदसलूकी सबसे आम कारण हैं। पर कुछ अजीबोगरीब कारण भी बताए गए हैं, जैसे- सेलफोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल या कंप्यूटर पर काम करने की मनाही आदि। खास बात यह है कि तलाक मांगने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।

दैनिक जागरण के एक समाचार में बताया गया है कि शादी के तीन महीने बाद ही तलाक की अर्जी दायर कर चुकी एक लड़की लगातार की जा रही दहेज की मांग को रिश्ते टूटने का एक प्रमुख कारण बताती है। 300 महिलाओं ने जहां अपने पति द्वारा दूसरी शादी की इच्छा को तलाक का कारण बताया है, वहीं 150 महिलाओं ने अपनी सास के दुर्व्यवहार को। कुछ महिलाओं ने अपनी आर्थिक परेशानियों के मद्देनजर तलाक मांगा है। सौ से ज्यादा महिलाओं द्वारा दायर तलाक के आवेदनों में कहा गया है कि उनके शौहर के पास नौकरी नहीं है, इसलिए वह उनके साथ नहीं रह सकतीं। कुछ ने तो यह कहा है कि उनका पति उनके साथ वक्त नहीं बिताता और रात भर किसी अजनबी से मोबाइल पर बात करता रहता है। और तो और 23 जोड़ों ने तो सिर्फ इसलिए तलाक मांगा है, क्योंकि उनकी जोड़ी बेमेल है।

Saturday, 29 March 2008

नहीं भा रहा दांपत्य जीवन, नवविवाहितों को!

ब्रिटेन में पिछले बीस साल पहले तलाक दर 37 प्रतिशत से बढ़कर 45 फीसदी पहुंच गई है, जिससे यहां तलाक लेने वालों की संख्या पचास प्रतिशत हो गई है मतलब ब्रिटेन में नई शादी करने वाले हर दो दंपतियों में से एक दंपति तलाक ले लेता है।

ब्रिटिश राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार शादी के एक दशक बाद तलाक का जोखिम कम हो जाता है और 31 फीसदी तलाक की घटनाएं शादी के दस साल बाद ही होती हैं, जबकि पंद्रह प्रतिशत घटनाएं शादी के बीस साल बाद होती हैं। कार्यालय ने यह आंकडे़ एक वेबसाईट पर आयी रिपोर्ट , जिसमें तलाक की दरों में रिकार्ड कमी बताई गई थी, के एक दिन बाद जारी किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 45 फीसदी शादियां अपनी शादी की 50वीं सालगिरह मनाने से पहले ही टूट जाती है तथा इनमें से आधी दस साल से पहले टूट जाती है।

पहले तलाक ले चुके और किशोरावस्था के लोगों में तलाक लेने की प्रवृत्ति ज्यादा है। सामाजिक नीति केंद्र के डान बाउचर ने कहा कि अगर सरकार शादी का पंजीकरण कर प्रणाली के तहत कर दिया जाए तो शादी के संबंध को टूटने से रोकने में मदद मिलेगी।

Thursday, 20 March 2008

यादें, याद आती हैं

किसी के जिंदगी से निकल जाने के बाद हम उससे जुड़ी हर चीज से मुंह मोड़ने लगते हैं। लेकिन क्या आप इसके लिए अपने घर, कार, जॉब और यहां तक कि अपने दोस्तों से भी पीछा छुड़ाना चाहेंगे? पड़ गए सोच में, लेकिन ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया में जा कर बसे इयान अशर कुछ ऐसा ही करने वाले हैं।

एक साल से ज्यादा समय हो गया जब इयान और उनकी बीवी पांच साल साथ रहने के बाद अलग हुए। लेकिन वे मानते है कि आज भी उनकी जिंदगी की हर चीज, यहां तक कि फर्नीचर भी उन्हें उस रिश्ते की याद दिलाते हैं। इसलिए उन्होंने अपना सबकुछ ऑनलाइन सेल के लिए रख दिया है। इयान के शब्दों में, 'जिस दिन यह सब बिक जाएगा, मैं घर से सिर्फ एक पर्स और पासपोर्ट लेकर निकल जाऊंगा।'

सेल में उनका पर्थ में स्थित तीन बेडरूम वाला घर और उसके भीतर रखी सारी चीजें यहां तक कि कार, मोटरसाइकल, जेट स्की और पैराशूटिंग गियर भी होगा। सेल के मुताबिक वे अपने दोस्तों से एक बार परिचय कराकर, अपने जॉब पर ट्रायल का मौका देकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करने दुनिया की सैर पर निकल जाएंगे, जिसमें इंग्लैंड में रह रही अपनी मां से मिलना भी शामिल है।

समाचार को यहाँ देखा जा सकता है। अगर आप भी बोली लगाना चाहते हैं तो उनकी वेबसाईट पर जाएँ.

Monday, 17 March 2008

इंटरनेट से तलाक मान्य नहीं

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने महिला और पुरुषों को समान अधिकार दिए जाने को लेकर कुरान के हिसाब से नया निकाहनामा जारी किया है। इसके अनुसार 'तीन बार तलाक' कहने मात्र से ही तलाक नहीं होगा।

मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने ईमेल, एसएमएस, फोन और इंटरनेट से होने वाले तलाक को भी मानने से इनकार किया है तथा कहा है कि अब तलाक के लिए पति और पत्नी को तीन माह का समय दिया जाएगा कि वे इस बीच अपने विवाद खत्म कर लें। यदि इस अवधि में भी विवाद खत्म नहीं होता तो ही तलाक होना माना जाएगा। इन तीन महीने के दौरान पति- पत्नी साथ रहेंगे।

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि इस नए निकाहनामे में महिला और पुरुष को बराबर के अधिकार दिए गए हैं। निकाह के साथ ही एक फार्म भी भरा जाएगा जो मैरेज ब्यूरो में जमा होगा तथा इस पर पति-पत्नी और काजी के हस्ताक्षर होंगे। किसी तरह का विवाद होने पर यह एक कानूनी दस्तावेज होगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाईस्ता अम्बर ने कहा कि यह ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जारी किए गए मॉडल निकाहनामे से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि कुरान में भी महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि मॉडल निकाहनामा उर्दू में है, जबकि इस नए निकाहनामे को उर्दू के साथ हिन्दी में भी जारी किया गया है, ताकि यह सामान्य लोगों की समझ में आ सके या वैसी मुस्लिम महिलाओं को भी जानकारी हो सके, जिन्होंने उर्दू की शिक्षा नहीं ली है।

नए निकाहनामे में शरीयत के हिसाब से शौहर और पत्नी के लिए निकाह के वास्ते ।7 हिदायतें दी गई हैं तथा 8 हिदायतें तलाक के लिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हिदायत जबरन शादी को लेकर है। शरीयत कानून के हिसाब से जबरन शादी को मान्यता नहीं दी गई है। निकाह दोनों पक्षों के अलावा पति और पत्नी की आपसी सहमति से बेहतर भविष्य के लिए है।

Tuesday, 12 February 2008

मिल सकता है तलाक, 'पाप' की आशंका पर

महिला के पक्ष में जारी एक फतवे में कहा गया है कि यदि कोई शख्स अपनी पत्नी के साथ नहीं रह रहा है और पत्नी को लगता है कि अपनी स्वाभाविक जरूरतों के लिए मैं 'पाप' में घिर सकती हूं, तो वह तलाक यानी 'खुला' ले सकती है।

भारत की विख्यात इस्लामी संस्था दारुल उलूम देवबंद की फतवा जारी करने वाली इकाई दारुल इफ्ता ने हाल ही में एक महिला की फरियाद पर यह फतवा जारी किया है। केरल की रहने वाली इस महिला की शादी वहीं के व्यक्ति से हुई जो दुबई में कार्यरत है। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ ही दिन बाद पति और उसके घर वाले उसे पीटने और कई तरह के दुर्व्यवहार करने लगे। पत्नी ने इस पर तलाक की मांग की तो वह दुबई भाग गया।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, बरसों से बेबस जिंदगी जी रही इस महिला ने पिछले महीने दारुल इफ्ता में गुहार लगा कर पूछा कि विदेश भाग गए जालिम पति से कैसे छुटकारा पाकर नया जीवन शुरू करे। दारुल इफ्ता ने इस पर दिए फतवे में कहा कि किसी महिला को 2 परिस्थितियों में निकाहनामे को रद्द कर पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक देने पर बाध्य करने का अधिकार है। पहला यह कि अगर पति अपनी पत्नी को जीवन यापन का खर्चा नहीं देता है और दूसरा यह कि यदि पत्नी को यह डर महसूस होता हो कि पति के दूर रहने से वह अपनी स्वाभाविक शारीरिक जरूरतों के लिए ''पाप'' में घिर सकती है। पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक के लिए मजबूर करने के लिए ये 2 कारण ही काफी हैं।

'खुला' और तलाक में मुख्य अंतर यह है कि तलाक देने पर पुरुष को उसे गुजारा भत्ता देना होगा जबकि 'खुला' में वह इसके बाध्य नहीं है क्योंकि पत्नी संबंध विच्छेद के लिए पहल करती है। फतवे में कहा गया कि ऐसी सूरत में दूर रह रहा पति यदि तलाक देने से कतरा रहा हो तो पत्नी अपना मामला शरिया पंचायत में ले जा सकती है। पंचायत शिकायत सही पाने पर पति को तलाक देने के लिए बाध्य कर सकती है। इस पर भी यदि वह ऐसा नहीं करता है तो शरिया पंचायत 'मलिकी मसलक' के तहत निकाह को रद्द कर महिला को पति से मुक्ति दिला सकती है।

Sunday, 20 January 2008

वश में हो, तो तलाक ले लेंगी ज्यादातर महिलाएं

मेरे ख्याल से यह स्थिति तो हर जगह होगी जैसी ब्रिटेन में पायी गयी है, जहाँ ज्यादातर शादीशुदा ब्रिटिश महिलाओं का वश चले तो वे अपने पति से तलाक लेना पसंद करेंगी। एक सर्वे में यह बात सामने आई है।

शादीशुदा पुरुषों और महिलाओं पर सर्वे में 59 फीसदी महिलाओं ने कहा कि अगर भविष्य में आर्थिक सुरक्षा तय हो, तो तुरंत तलाक ले लेंगी। महिलाओं और पुरुषों दोनों में 10 में से एक का कहना था कि काश मैंने किसी और से शादी की होती। सर्वे के मुताबिक, आधे से ज्यादा पति अपनी शादीशुदा जिंदगी में प्यार का अभाव मानते हैं।

इस सर्वे में 2000 वयस्क ब्रिटिश शामिल किए गए। इनमें करीब 30 फीसदी ने अपनी शादी को नाकाम माना और कहा कि अचानक जिंदगी में उथल-पुथल से बचने के लिए शादी के बंधन को निभा रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों में करीब आधे ने कहा कि परिवार को बिखरने से बचाने के लिए हम साथ रह रहे हैं। 30 फीसदी पुरुषों का कहना था कि हम अपने बच्चों की खातिर साथ रह रहे हैं। 56 फीसदी लोगों ने माना कि अपने वैवाहिक रिश्तों से पूरी तरह खुश नहीं हैं। आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि हमने तलाक लेने पर विचार किया था।

Monday, 3 December 2007

तलाक और पर्यावरण!

एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि तलाक के बढ़ते मामले वैश्विक गर्माहट (ग्लोबल वार्मिंग) को बढ़ाते हैं।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को अध्ययन में पता चला है कि तलाक के बाद महिला घर छोड़कर एक नई गृहस्थी बसाने की तरफ बढ़ती है। लेकिन इसके बाद वह प्राकृतिक संसाधनों का कार्यकुशलता के साथ उपयोग नहीं करती। इसके साथ ही भूमि, आवास और घरेलू उपयोगी सामानों पर खर्च बढ़ जाता है।

‘न्यूज ऑस्ट्रेलिया’ के ऑनलाइन संस्करण के हवाले से बताया गया कि शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 2001 और 2005 के बीच 3,283 घरों का सर्वेक्षण किया।

सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने पाया कि तलाक के बाद गृहस्थी उपयोगी चीजों की मांग काफी बढ़ जाती है। गृहस्थ जीवन में जहां कमरे की मांग छह फीसदी की दर बढ़ती है वहीं तलाक के बाद प्रति व्यक्ति कमरे की संख्या में 61 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस की खबर में यह भी कहा गया है कि तलाक के बाद प्रति व्यक्ति कचरा उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी हो जाती है। इन कारकों से पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन पर भी असर पड़ता है और जैव विविधता भी प्रभावित होती है।

Saturday, 24 November 2007

मैं इस घर को आग लगा दूंगा ...

कहना आसान है कि मैं ऐसे घर को आग लगा दूंगा, लेकिन बीबी से खुंदक होने पर ब्रिटेन के एक आदमी ने अपने घर को आग लगा दी। करीब साढ़े 3 लाख पाउंड (करीब ढाई करोड़ रुपये) का वह मकान तलाक के बाद उसकी पत्नी के पास जाने की संभावना थी।

बिल्डर गैरी हूली अपनी पत्नी मिशेल से गुस्से में यह बात पहले भी कई बार कह चुका था। पुलिस को वह अपनी वैन में सोया हुआ मिला। हालांकि उसका कहना है कि यह काम उसका नहीं है। लेकिन उसका भरोसा किसी को नहीं। उसने उस रात काफी बियर पी थी।

नवभारत टाइम्स की खबर है कि घटना की रात दोनों मिशेल की एक सहेली के यहां पार्टी में गए थे। वहां भी गैरी काफी खराब मूड में था। मिशेल डांस करने गई। उसे अपने पर्स का ख्याल रखने को कहा तो वह नाराज हो गया। हालांकि बाद में दोनों ने साथ डांस किया तो उसका गुस्सा कुछ कम हुआ था। लेकिन बाद में फिर झगड़ा हो गया।

झगड़े की वजह से रात को मिशेल घर भी नहीं लौटी। अपनी सहेली के घर ही रुक गई। सुबह पुलिस से ही सूचना मिली कि उसके घर में आग लग गई है। उसके सारे कपड़े और दूसरा सामान भी जल गया।

50 वर्षीय हूली ने कुछ दिन पहले ही अपने बंगले का साज सज्जा करवाई थी। बंगला मिशेल के नाम में था। पहली शादी से मिले इस बंगले के बीमे की किस्तें भी वही दे रही थी। महंगे जेवरात और 70 जोड़े जूतों का भी बीमा कराया हुआ था।

गैरी और मिशेल बचपन से एक दूसरे को जानते थे। शादी से पहले 2 साल तक इश्क चला था। लेकिन शादी होते ही इश्क हवा हो गया। पिछली जुलाई से कई बार दोनों ने अदालत के कहने पर साथ रहने की कोशिश की। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। लगता है यह समस्या सर्वव्यापी है.