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Tuesday, 14 October 2008

अरे वाह! अब पति भी किराए पर मिलेंगे

अभी अभी तो हमने पढ़ा था कि अब अपने देश में ही सुंदर महिला साथी भी किराए पर उपलब्ध है। वो भी 10 से 15 हजार रुपए प्रति शाम के हिसाब से। फिर उस पर टिप्पणियाँ भी देखीं कि 'पता नहीं कब पुरूष महिला के बिना जीना सीखेगे।' 'कोई खरीदे गये साथी के साथ सच्ची खुशी कैसे पा सकता है।' 'क्या युवक बिकना नहीं चाहते या युवतियों के पास अभी रुपए नहीं आये?'

इन सबका समाधान अब सामने है। बेशक बात अर्जेंटीना की है, देर-सबेर यहाँ भी वही हाल होगा। वहां जिन महिलाओं को अपने पतियों से इस बात की शिकायत रहती है कि उनके पति घर के काम में उनका हाथ नहीं बंटाते वे अपने शयनकक्ष की शांति बनाए रखते हुए किराए के पतियों की सेवाएं ले सकती हैं। इससे उन महिलाओं को काफी फायदा हो रहा है जिनके पति घर के काम में निपुण नहीं हैं या फिर रुचि नहीं लेते। जी हां, अर्जेटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में एक कंपनी महिलाओं को 15.50 डालर (करीब 760 रुपये) प्रति घंटे के हिसाब से किराए के पति उपलब्ध करा रही है। कंपनी का कहना है कि जो महिला अपने घर के काम में रुचि नहीं लेने वाले पति से परेशान है, वह किराए के पति की सेवाएं ले सकती है। अपनी वेबसाइट पर कंपनी महिलाओं को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के विज्ञापन भी देती है। मसलन, 'क्या आप घर के काम में हाथ नहीं बंटाने वाले अपने पति से परेशान हैं? तो, सब कुछ भूलकर हमारे पास आइए', और 'अगर आपके पति घर के काम में रुचि नहीं लेते तो सब कुछ भूलकर हमारे पास आइए'।

इस कंपनी का नाम भी बड़ा ही दिलचस्प 'हसबेंड फार रेंट' रखा गया है। कंपनी आमतौर पर अकेली, तलाकशुदा और विधवा महिलाओं को किराए का पति उपलब्ध कराती है। कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले किराए के पतियों को बिजली और लकड़ी के काम सहित कई और काम अच्छी तरह आते हैं।

कंपनी के मालिक डेनियल अलोंसो ने बताया कि उन्हें यह अजीबोगरीब आइडिया उस दिन आया जब उनकी पड़ोसन ने अलोंसो की पत्नी से अपना पति किराए पर लेने का मजाक किया। 56 वर्षीय अलोंसो का दावा है कि उनकी कंपनी के पास अभी दो हजार ग्राहक हैं। अलोंसो ने कहा कि सस्ते में घर के काम निपट जाने के कारण महिलाओं को यह सुविधा खूब पसंद आ रही है।

ब्यूनस आयर्स में कंपनी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है कि अब उसके पास रात के तीन बजे भी फोन कॉल आते हैं।

सम्बंधित समाचार यहाँ पढ़ा जा सकता है।

Friday, 10 October 2008

नारी की आवाज़ तेज? अरे! यही उन्हें ज्यादा आकर्षक बनाती है।

एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि अपने मासिक चक्र के दौरान महिलाओं का स्वर तब तेज हो जाता है जब वह अधिक प्रजननशील होती हैं और यही उन्हें ज्यादा आकर्षक बनाता है। शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि प्रजननशीलता के साथ महिलाओं की आवाज कम या ज्यादा हो जाती है।

असल में, महिलाओं की आवाज अंडोत्सर्ग के एक या दो दिन पहले तेज हो जाती है। इन्हीं दिनों में उनके गर्भधारण की संभावनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यह पहला खुलासा है जब आवाज और प्रजननशीलता के बीच संबंधों का पता चला है। इससे इस विचार को समर्थन मिलता है कि मनुष्यों में भी प्रजननशीलता के बाहरी संकेत पशु-पक्षियों की ही तरह दिखाई देते हैं।

शीर्ष शोधकर्ता डा. ग्रेग ब्रायंट ने कहा, हमारा अध्ययन दर्शाता है कि प्रजननशीलता के अनुसार महिलाओं के स्वर में परिवर्तन आता है। वे अंडोत्सर्ग के जितने नजदीक होती हैं, उनका स्वर उतना बढ़ जाता है। हम यह कह रहे हैं कि स्वर तेज होने से उनकी प्रजननशीलता बढ़ जाती है और उनमें आकर्षण बढ़ जाता है। डा. ब्रायंट और कैलिफोर्निया विश्वविघालय के उनके सहयोगी 69 महिलाओं की आवाज के विश्लेषण के बाद इस नतीजे पर पहुंचे।

कुछ अधिक जानकारी यहाँ मिलेगी.

Friday, 3 October 2008

मुझको अपने गले लगा लो, ऐ मेरे जीवनसाथी

महंगे तोहफे देने या शाम को किसी आलीशान होटल में डिनर करने से ही शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं होती। शोधकर्ताओं ने खुशहाल शादीशुदा जिंदगी का गैरखर्चीला राज ढूंढ निकाला है। इसके मुताबिक दिन में चार बार अपने साथी को गले लगाकर शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल बनाए रखा जा सकता है। अध्ययन के मुताबिक हर महीने अपने साथी के साथ कम से कम 22 बार पर्याप्त समय बिताकर आप अपने रिश्ते मधुर बनाए रख सकते हैं। इसमें साथ टहलना या रोमांटिक डिनर करना जैसी बातें भी शामिल हैं। 'द डेली टेलीग्राफ' में शोधकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि इसके लिए चार हजार जोड़ों पर एक अध्ययन किया गया।

अध्ययन के नतीजों से खुलासा हुआ कि अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुशी तलाश रहे लोगों को महीने में कम से कम सात शाम एक-दूसरे के नाम करनी चाहिए। महीने में दो बार अपने साथी के साथ लांग ड्राइव पर जाने या या फिल्म देखने से भी बात बन सकती है। शोध में पतियों को महीने में एक बार अपनी पत्नी को उपहार देने की भी बात कही गई है। यही नहीं, इसमें महीने में एक शाम अपने साथी से अलग बिताने की भी सलाह दी गई है। मनोचिकित्सक लुडविग लोवेनस्टीन कहते हैं कि दांपत्य जीवन में प्यार भरे शब्द और हाव-भाव काफी मायने रखते हैं। कामकाज और परिवार पालने के चक्कर में लोग अक्सर अपने साथी को नजरअंदाज करते हैं। यहां तक कि लोग गले लगना सरीखी छोटी-छोटी बातों की अहमियत भी भूल जाते हैं।
(साभार: जागरण)

प्राथमिकता के लिहाज से सेक्स 17वें पायदान पर

भारतीय दंपती अभी भी सेक्स जैसे मुद्दे पर आपस में खुलकर बातचीत नहीं करते। एक सर्वे के मुताबिक, भारतीय पुरुषों के लिए प्राथमिकता के लिहाज से सेक्स 17वें पायदान पर आता है, जबकि महिलाओं में यह 14वें नंबर पर है। पारिवारिक जीवन के अलावा पुरुषों ने जीवनसाथी, करिअर, मां या पिता की भूमिका निभाने, आर्थिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होने को अहमियत दी। कमोबेश महिलाओं की भी यही प्राथमिकताएं थीं।

यह सर्वे जानी-मानी दवा कंपनी फाइजर ग्लोबल फार्मास्युटिकल्स द्वारा कराया गया है। इससे निकले नतीजों के मुताबिक यौन संतुष्टि का शारीरिक स्वास्थ्य और प्यार या रोमैंस से गहरा संबंध है। मुंबई के लीलावती अस्पताल के डॉक्टर रुपिन शाह का कहना है कि भारत में जो पुरुष यौन जीवन से संतुष्ट नहीं हैं, उनके समग्र जीवन में भी संतुष्टि की कमी है। भारत में हुए इस सर्वे में 400 इलाके चुने गए थे। इनमें से अधिकतर शहरी क्षेत्र थे। इस पर टिप्पणी करते हुए शाह कहते हैं कि इस सर्वे को शहरी कहा जा सकता है। लेकिन एक डॉक्टर होने के नाते मैं जानता हूं कि देश के ग्रामीण इलाकों से भी सर्वे के ऐसे ही नतीजे निकलते।

सर्वे के अनुसार भारत सहित एशिया प्रशांत क्षेत्र देशों के 57 फीसदी पुरुष और 64 फीसदी महिलाएं सेक्स जीवन से बहुत संतुष्ट नहीं हैं। जो महिला और पुरुष अपने यौन जीवन से बहुत अधिक संतुष्ट हैं, उनमें से 67-87 फीसदी ने कहा कि वे अपने जीवन से खुश हैं। दूसरी ओर ऐसे लोग जो अपने सेक्स जीवन से कम संतुष्ट हैं, उनमें से महज 10 से 26 फीसदी ने माना कि उनकी जिंदगी खुशहाल है।

इस सर्वे का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि पुरुष सेक्स को जिंदगी की अहम प्राथमिकताओं में जगह देते हैं। दूसरी ओर, महिलाएं उसे कम तरजीह देती हैं। सर्वे में भारतीय पुरुषों की स्तंभन कठोरता और उनके सेक्स जीवन में भी सीधा संबंध देखा गया। इस सर्वे में भारत सहित 13 देशों के 25 से 74 की उम्र के कुल 3,957 लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें 2016 पुरुष और 1,941 महिलाएं शामिल थीं।

Monday, 29 September 2008

युवती के धूम्रपान की आदत से उसका विवाह टूटते-टूटते बचा

धूम्रपान की आदत एक युवती को इतनी महंगी पड़ी कि उसका विवाह टूटते-टूटते बचा। महिला ने एक शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं कि अगर वह दोबारा धूम्रपान करेगी तो उसका पति उसे बिना गुजारा भत्ता दिए तलाक दे सकेगा। युवती का पति धूम्रपान नहीं करता है और वह इसी शर्त पर अपनी पत्नी को मायके से वापस लाया है कि वह अब धूम्रपान नहीं करेगी।

हुआ यूं कि घर में अलग-अलग जगहों से सिगरेट की गंध आनी शुरू हो गई। इससे घरवालों को आश्चर्य हुआ क्योंकि घर में और कोई सिगरेट नहीं पीता था। खिड़कियों के आस-पास सिगरेट के टोटों ने इस बात की पुष्टि कर दी कि घर में कोई धूम्रपान कर रहा है। अमरावती की रहने वाली यह युवती अपने कालेज के समय में धूम्रपान की आदी हो गई थी और वह अपनी ससुराल में छिपकर सिगरेट पीती थी। एक दिन उसके सास-ससुर ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

पकड़े जाने पर युवती ने कहा कि वह कई बार धूम्रपान की आदत छोड़ने की कोशिश कर चुकी है लेकिन उसे इसमें सफलता हासिल नहीं हुई। घरवालों ने उसे कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया लेकिन वह अपनी आदत नहीं त्याग पाई और उसने छिप-छिप कर दोबारा सिगरेट पीना शुरू कर दिया। धूम्रपान छोड़ने संबंधी कोर्स पूरा करने के बाद उसका पति उसे वापस ले आया है लेकिन एक हलफनामे के साथ।

Sunday, 21 September 2008

मां का जुड़ाव, सिजेरियन के बजाय सामान्य प्रसव से पैदा हुए बच्चे से ज्यादा

धरती पर सबसे प्रगाढ़ और करीबी रिश्ता मां और उसके बच्चे का होता है। लेकिन हाल में हुए एक शोध में खुलासा किया गया है कि मां का जुड़ाव आपरेशन (सिजेरियन) के बजाय सामान्य प्रसव से पैदा हुए बच्चे से ज्यादा होता है। अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर जेम्स स्वेन ने शोध के दौरान सिजेरियन बच्चे की मांओं और सामान्य प्रसव से हुए बच्चों की मांओं की ब्रेन स्कैनिंग की। स्कैनिंग के दौरान उन्हें बच्चे के रोने की आवाज भी सुनाई गई। साथ ही उनके बच्चों की देखभाल करने संबंधी विचार भी जाने गए।

जिन मांओं के बच्चे सामान्य प्रसव से पैदा हुए थे उनके मस्तिष्क के कार्टेक्स में रोने की आवाज पर ज्यादा प्रतिक्रिया देखी गई। कार्टेक्स मस्तिष्क का वह हिस्सा होता है जो भावनाओं और संवेदनाओं के लिए जिम्मेदार होता है। स्वेन के मुताबिक सामान्य प्रसव से पैदा हुए बच्चों से ज्यादा जुड़ाव के पीछे न्यूरोहार्मोनल कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें आक्सीटोसिन हार्मोन प्रमुख है। आक्सीटोसिन हार्मोन भावनात्मक जुड़ाव और प्यार का एहसास करने में बड़ी भूमिका निभाता है। इसके उलट सिजेरियन प्रसव में न्यूरोहार्मोनल कारकों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसके कारण बच्चों से लगाव घट जाता है और प्रसवोत्तर अवसाद का खतरा भी बढ़ जाता है। इन सबके बावजूद स्वेन का कहना है कि हमारा इरादा भ्रांति पैदा करना नहीं है। 

समाचार यहाँ है, अधिक जानकारी के लिये गूगल बाबा है ना!

अपडेट-5:30PM: चित्र व लिंक लगाये गये

Wednesday, 3 September 2008

शादी टूटने का कारण किसी की बेवफाई या अड़ियलपन नहीं, बल्कि खास जीन

शादी टूटना गंभीर समस्या है। मियां-बीवी के बीच व्यवहार संबंधी कई कारणों को इसका जिम्मेदार बताया जाता है। लेकिन स्वीडन के शोधकर्ताओं की मानें तो शादी टूटने का कारण किसी एक की बेवफाई या अड़ियलपन नहीं बल्कि खास जींन होते है। ये जीन पुरुष और महिला के जुड़ाव में भी अहम भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिकों ने तलाक और पुरुषों में मिलने वाले एक जीन के बीच एक खास संबंध देखा है। अब बहुत मुमकिन है कि कुछ समय बाद तलाक के मसले सुलझाने के लिए दंपती काउंसिलर की जगह जिनेटिक क्लीनिक की राह पकड़ने लगें।

कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट, स्टॉकहोम के हसी वैलम और उनके सहयोगियों का कहना है कि किसी भी रिश्ते में समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं। वैलम भी जोर देकर कहते हैं कि महज़ जीन के आधार पर किसी पुरुष के व्यवहार का आकलन करना ठीक नहीं होगा। लेकिन वह यह भी कहते हैं कि इस जीन में इसी तरह के असर से हमारे शोध को काफी बल मिलता है। फिर भी इस शोध से इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि वैज्ञानिक एक दिन ऐसी दवाएं बना सकेंगे जो इस जीन पर असर करके शादियों को टूटने से बचा सकें।