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Monday, 28 July 2008

टाई लगायी, मूंछ कटायी, फिर भी मामला गड़बड़ है

शहरी लुक देने के चक्कर में बीवी ने उसकी शानदार मूंछे कटवा दी। गांव में उसे टाई लगाकर घूमने के लिए दबाव बनाती है। गांव के युवक को शहरी बनाने के सपने देखने वाली एक ब्याहता अपने पति और ससुरलियों पर मारपीट करने का आरोप लगा रही है, जबकि उसके पति ने महिला पर ही आरोप लगाते हुए कहा कि उसे शहरी बनाने के चक्कर और घरेलू काम न करने के चलते विवाद हो रहा है। फिलहाल मामला परिवार परामर्श केंद्र में है।

अमर उजाला में आयी इस ख़बर के मुताबिक, विजयनगर, गाजियाबाद के रहने वाले इस युवक की शादी 30 जनवरी 2005 को दिल्ली निवासी युवती के साथ हुई थी। युवती का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। उससे दहेज की मांग की गई, मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट की गई। इन हालातों में उसका ससुराल में रहाना दूभर हो गया। जिसके चलते वह काफी दिनों से अपने मायके में रह रही है।

दूसरी तरफ, विवाहिता का पति दूसरा ही मामला बता रहा है। उसका कहना है की उसकी बीवी न तो ढंग का खाना बना पाती है, न ही कोई घरेलू काम करती है। साथ ही गांव के माहौल में रहने के बावूजद उसे शहरी लुक देने के चक्कर में लगी रहती है। वह मूंछे रखता था, उन्हें उसने कटवा दिया। इतना ही नहीं, टाई लगाने के लिए जोर देती है। कई बार वह लगा भी चुका है, लेकिन बार-बार उसके लिए यह सब करना बहुत मुश्किल है। गांव के माहौल में उसे यह सब करना बहुत अजीब लगता है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। परिवार परामर्श केंद्र के काउंसलरों के मुताबिक, दोनों पक्ष समझाने पर साथ रहने के राजी हो गए हैं। अब कुछ शर्तों के तहत ब्याहता को उसके ससुराल भेजा जाएगा।

Thursday, 3 July 2008

बुरे चरित्र के पुरूषों का सेक्स जीवन, बेहतर होता है

अपने आप को अच्छे कहे जाने वाले पुरूषों का एक आम रोना रहा है कि महिलाएं उन्हें भाव नहीं देतीं और बुरे के 'चंगुल' में फंस जाती हैं। अब वैज्ञानिक शोध में भी यह बात साबित हो गई है कि असामाजिक व्यक्तित्व वाले पुरुष जिंदगी में और कुछ हासिल करें या करें, लड़कियों, महिलायों को आकर्षित करने के मामले में वे बाजी मार लेते हैं। New Scientist पत्रिका के मुताबिक अमेरिकी शोधकर्तायों ने 57 देशों में करीब 35 हजार लोगों पर कराए गए सर्वेक्षण में नतीजा निकाला कि आक्रामक, कठोर ह्रदय, चालाक और मतलबी स्वभाव के लोगों का सेक्स जीवन बेहतर होता है। अध्ययन के नतीजों को हाल ही में जापान के क्योटो शहर में आयोजित Human Behavior and Evolution Society की एक सभा में पेश किया गया।

New Mexico State University के शोधकर्ता और अध्ययन समूह के अगुआ पीटर जॉनसन के मुताबिक बिंदास जिंदगी जीने वाले इन लोगों के चरित्र की नुमाइंदगी कुछ हद तक काल्पनिक चरित्र, जेम्स बॉन्ड करता है। ऐसे लोग जो समझौते करने में यकीन नहीं रखते और न ही अंतर्मुखी होते हैं। नए-नए काम करना उनकी फितरत होती है, जिनमें लोगों को मारना और नई औरतें हासिल करना भी शामिल है। ऐसे लोग कम समयावधि के रिश्तों में यकीन रखते हैं। ये दूसरों की बीवियों या प्रेमिकाओं पर नजर रखते हैं और उनसे थोड़े समय के लिए संबंध बनाने की कोशिश करते हैं।

अध्ययन की खास बात यह है कि यह सिर्फ पुरुषों पर लागू होती है। यानी इसी चरित्र की महिलाएं, सेक्स जीवन के मामले में कामयाबी हासिल नहीं कर पातीं। यह भी कहा गया कि अच्छे चरित्र के पुरूषों को निराश होने की जरूरत नहीं। पिछली कई अवसरों पर यह बात साबित हो चुकी है कि लड़कियां थोड़े वक्त या किसी खास मकसद के लिए भले ही किसी को चुन लें, लेकिन जिंदगी में व्यवस्थित उन्हीं पुरुषों के साथ होना चाहती हैं, जो अच्छे चरित्र के हों और उनका ख्याल रख सकें.

Scientists have now confirmed what good guys always knew: bad boys get the girls.

Researchers have shown that across cultures it really does pay to have a mean streak - with callous, self-obsessed, deceitful men proving the biggest hit with the opposite sex.

The findings, reported at the Human Behaviour and Evolution Society meeting in Kyoto, Japan, may help to explain why anti-social personality traits, known as the 'dark triad', could have an upside: a prolific sex life.

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Monday, 30 June 2008

तलाक के बाद, आखिरकार 1 करोड़ 63 लाख रूपयों में बिक गया वो

पत्नी से तलाक के बाद ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेट के जरिये अपने घर, नौकरी और अपने मित्रों से मुलाकात के मौके सहित अपना जीवन बेच रहे इयान ने कहा कि उसने अपने जीवन को 399 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (383.23 हजार अमेरिकी डॉलर या 1,63,68,039 भारतीय रूपयों) में इसे बेचा है।

ब्रिटेन में पैदा हुए इयान अशर (44) ने पश्चिमी शहर पर्थ में अपना घर, कार, मोटरसाइकिल, जेट स्की और अपना अन्य सामान बेचने का फैसला किया। लाइफ पैकेज में न सिर्फ कपड़ों और डीवीडी जैसे संग्रह शामिल था बल्कि कारपेट सेल्समैन की उसकी पुरानी नौकरी और उसके कुछ मित्रों से मुलाकात का मौका भी शामिल था। इंटरनेट नीलामी साइट इबे पर सात दिन चली बिक्री के बाद अशर ने कहा, 'अंतिम कीमत 399 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रही। यह पूछने पर कि कीमत के बारे में वह क्या महसूस करता है उसने कहा कि यह काफी अच्छी है।

इयान के अन्तिम संदेश, सहित अन्य ब्लॉग संदेश यहाँ देखे जा सकते हैं।

Sunday, 29 June 2008

प्यार, सेक्स, विवाह के लिए हल्की दाढ़ी वालों को पसंद करती हैं महिलायें

बहुत से पुरूष महिलाओं को रिझाने के लिए दाढ़ी मूंछ मुंडा देते हैं, लेकिन एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाएं प्रेम, सेक्स और शादी के लिए उन पुरूषों को अधिक पसंद करती हैं जिनकी ठुड्डी पर हल्की दाढ़ी होती है। इस विषय को लेकर ब्रिटेन में अनुसंधानकर्ताओं ने एक शोध किया और पाया कि महिलाएं ‘क्लीन शेव’ या पूरी दाढ़ी रखने वाले पुरूषों की तुलना में उन पुरूषों की तरफ अधिक आकर्षित होती हैं जो हल्की दाढ़ी रखते हैं।

ब्रिटिश अखबार द संडे टेलीग्राफ में अग्रणी अनुसंधानकर्ता और नोर्थुम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के डाक्टर निक नीव के हवाले से कहा गया है, पुरूषों का हल्का दाढ़ी युक्त चेहरा सेक्स का एक शक्तिशाली संकेतक है और यह स्पष्ट तौर पर सेक्स परिपक्वता की जैविक पहचान भी है। अपने अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने नवीनतम कंप्यूटर प्रौघोगिकी का इस्तेमाल कर 15 पुरूषों की तस्वीरों को विभिन्न आयामों में देखा। इन तस्वीरों में क्लीन शेव, हल्की दाढ़ी, भारी भरकम दाढ़ी और पूरी दाढ़ी रखने वाले पुरूषों की तस्वीरों को शामिल किया गया। ये तस्वीरें 76 महिलाओं को दिखाई गईं और उनसे पूछा गया कि वे इनमें से किस पुरूष को कितना पसंद करती हैं। वे इनमें से किस व्यक्ति को कम या दीर्घावधि के लिए अपना हमसफर बनाना चाहेंगी। इस अध्ययन से पता चला कि महिलाओं ने प्यार, सेक्स और विवाह के लिए उन लोगों को सबसे अधिक पसंद किया जिनके चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी। अध्ययन के परिणाम Personality and Individual Differences पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

The Sunday Telegraph की खबर यहाँ देखी जा सकती है।

Saturday, 28 June 2008

शादीशुदा लोगों से ज्यादा तलाकशुदा

शादी के लायक लोगों की संख्या बढ़ रही है, पर शादी करने की इच्छा रखने वालों की संख्या में कमी आ रही है। पिछले कुछ सालों में तलाक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि 16 वर्ष से अधिक आयु के ज्यादातर लोग या तो अकेले हैं, तलाकशुदा हैं या फिर अपने साथी को खो चुके हैं। ब्रिटेन में तलाकशुदा लोगों की संख्या शादीशुदा लोगों से अधिक है। हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़े यही साबित करते हैं। ऑफिस ऑफ नेशनल स्टेटिस्टिक्स (ओएनएस) के अनुसार वर्ष 2006 में इंग्लैंड और वेल्स में 2,36,980 शादियां हुईं, जो वर्ष 1895 से लेकर आज तक का न्यूनतम आंकड़ा है।

वर्ष 2005 के आंकड़ों के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स के शादीशुदा वयस्कों की संख्या घटकर 50.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। शादीशुदा जोड़ों की संख्या में वर्ष 1997 से लगातार गिरावट आ रही है और वर्ष 2006 तक शादीशुदा जोड़ों का अनुपात गिरकर आधे से भी कम रह गया है। हालांकि वर्ष 1995 में कुल जनसंख्या में शादीशुदा जोड़ों का आंकड़ा 56 प्रतिशत था। उसके बाद इसमें प्रतिवर्ष 1,00,000 से 1,50,000 की गिरावट आई। ओएनएस की रिपोर्ट के अनुसार इसका एक कारण अधिक उम्र में शादी होना भी है। हाल के अनुमान के मुताबिक शादीशुदा लोगों का अनुपात गिरेगा, लेकिन एक निश्चित अनुपात में लोग शादी भी करेंगे।

सिविटास थिंक टैंक के रॉबर्ट व्हेलान कहते हैं कि कम शादी होने के चलन में कोई कमी आती नहीं दिख रही है। भविष्य में बहुत ही कम लोग शादीशुदा जोड़े के रूप में साथ रहेंगे। इस चलन के बुरे प्रभाव खराब स्वास्थ्य, कम आमदनी, नशीली दवाओं, शराब का सेवन, अपराध तथा असामाजिक व्यवहार के रूप में नजर आते हैं। व्हेलान कहते हैं कि यह दुर्भाज्ञपूर्ण है कि सरकार में किसी को इस प्रवत्ति की कोई परवाह नहीं है।

Wednesday, 25 June 2008

जो पांचों सवालों के सही उत्तर देगा, उसी को वह अपना वर चुनेगी।

शादी तो हर किसी की होती है, लेकिन वह इस कलियुग में स्वयंवर के माध्यम से अपने लिए वर ढूंढ़कर एक अलग मिसाल पेश करना चाहती है। स्वयंवर रचाने का निर्णय उसका अपना है। वह कुछ ऐसा करना चाहती है, जिसे सारी दुनिया याद रखे। त्रेतायुग में जनकपुर की राजकुमारी सीता के स्वयंवर की तरह यह स्वयंवर भी अनोखा होगा, लेकिन इसमें धनुष तोड़ने जैसी विशेष कला का प्रदर्शन नहीं होगा। अन्नपूर्णा के स्वयंवर में सम्मिलित हुए वरों से पांच सवाल पूछे जाएंगे। यह सवाल अभी गुप्त रखे गए हैं। आयोजन के दिन ही इसे सामने लाया जाएगा, जो वर पांचों सवालों के सही उत्तर देगा, उसी को अन्नपूर्णा अपना वर चुनेगी।

छत्तीसगढ़ में बालोद से 10 किमी दूर ग्राम घुमका में हल्बा समाज की, 13 सितंबर 1986 को जन्मी, अन्नपूर्णा के लिए स्वयंवर रचा जा रहा है। स्वयंवर समारोह में ऐसे वर सम्मिलित होंगे, जो अपने आपको अन्नपूर्णा के योग्य समझते हैं। स्वयंवर में भाग लेने वाले को पांच सवाल के जवाब तो देने ही होंगे, लेकिन इसके पहले उन्हें अपनी योग्यता का परिचय भी देना होगा। स्वयंवर की शर्त यह है कि युवक आदिवासी हल्बा समाज का ही हो। भंडारी गोत्र वाला युवक स्वयंवर में भाग नहीं ले सकेगा। वर की आयु कम से कम 22 और अधिकतम 26 वर्ष हो। स्वयंवर में बालोद, गुंडरदेही, लोहारा, गुरूर, धमतरी इन पांचों तहसील के ही युवक भाग लेंगे। स्वयंवर में भाग लेने के इच्छुक युवक 3 जुलाई तक ग्राम घुमका में आयोजक परिवार से संपर्क कर अपनी इच्छा व्यक्त कर सकते है।

अन्नपूर्णा के लिए योग्य वर का चुनाव स्वयंवर के माध्यम से हो,यह इच्छा माता पलटीन बाई और पिता रामरतन ठाकुर की भी थी। उनका परिवार रामचरित मानस कथा से काफी प्रभावित हैं, इसलिए वे भी इसका अनुकरण करते हुए सामान्य से हटकर कुछ अलग करने की चाह रखते हैं। पूरे गांव में उत्सवी माहौल होगा। स्वयंवर की खबर दूर-दूर तक पहुंच चुकी है। गली-गली में पंपलेट चिपकाया जा रहा है। लोगों में चर्चा होने लगी है। बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है। 8 जुलाई के दिन स्वयंवर आयोजित है। स्वयंवर समाप्ति के बाद सामाजिक रीति रिवाज एवं परंपरा अनुसार विवाह संपन्न कराया जायेगा।
(समाचार व चित्र दैनिक भास्कर से साभार)

Tuesday, 24 June 2008

प्यार और शादी की कोई उम्र नहीं

उज्जैन के शिवशक्तिनगर निवासी ८४ वर्षीय शंकरसिंह ने 57 वर्षीय विमलाबाई से शादी कर यह बात सिद्ध कर दी है कि प्यार और शादी की कोई उम्र नहीं होती है। ९ जून को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर यह वृद्ध युगत हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए। दोनों कई सालों से एकाकी जिंदगी जी रहे थे। अकेलेपन को दूर करने के लिए जीवन की सांझ में दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। दैनिक भास्कर में आयी ख़बर के अनुसार, शंकरसिंह और विमलाबाई दोनों का घर शिवशक्तिनगर में ही है। विमलाबाई के पहले पति संग्रामसिंह की मृत्यु १९९४ में हुई। वह तब से ही अकेली रह रही थी। शंकरसिंह की हालत भी ऐसी ही थी। उनकी पत्नी नर्मदाबाई की मृत्यु २००७ में हुई। दोनों की कोई संतान भी नहीं थी। शंकरसिंह एमपीईबी से रिटायर्ड हैं। दोनों का गुजारा शंकर की पेंशन से होगा।

शंकरसिंह की पत्नी नर्मदाबाई अंतिम दिनों में बीमार रहती थीं। पड़ोस में रहने की वजह से विमलाबाई नर्मदाबाई की देख-रेख करने के लिए शंकरसिंह के घर आती-जाती थी। नर्मदाबाई की मृत्यु के बाद शंकरसिंह अकेले रह गए। दोनों में आपसी समझ अच्छी थी, अत: शादी का निर्णय कर लिया। ६ मई को वकील काजी अखलाक एहमद के माध्यम से एडीएम कोर्ट में शादी की अर्जी दी गई। वहां से ९ जून को दोनों की शादी मंजूर हुई। दोनों ने शपथ पत्र में जीवन के एकाकीपन को शादी की वजह बताया। उन्होंने बताया कि दोनों के जीवनसाथी अब इस दुनिया में नहीं है और कोई संतान भी नहीं है, अत: वे एक-दूसरे के साथ जीवन के अंतिम दिन गुजारना चाहते हैं।