शहरी लुक देने के चक्कर में बीवी ने उसकी शानदार मूंछे कटवा दी। गांव में उसे टाई लगाकर घूमने के लिए दबाव बनाती है। गांव के युवक को शहरी बनाने के सपने देखने वाली एक ब्याहता अपने पति और ससुरलियों पर मारपीट करने का आरोप लगा रही है, जबकि उसके पति ने महिला पर ही आरोप लगाते हुए कहा कि उसे शहरी बनाने के चक्कर और घरेलू काम न करने के चलते विवाद हो रहा है। फिलहाल मामला परिवार परामर्श केंद्र में है।
अमर उजाला में आयी इस ख़बर के मुताबिक, विजयनगर, गाजियाबाद के रहने वाले इस युवक की शादी 30 जनवरी 2005 को दिल्ली निवासी युवती के साथ हुई थी। युवती का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। उससे दहेज की मांग की गई, मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट की गई। इन हालातों में उसका ससुराल में रहाना दूभर हो गया। जिसके चलते वह काफी दिनों से अपने मायके में रह रही है।
दूसरी तरफ, विवाहिता का पति दूसरा ही मामला बता रहा है। उसका कहना है की उसकी बीवी न तो ढंग का खाना बना पाती है, न ही कोई घरेलू काम करती है। साथ ही गांव के माहौल में रहने के बावूजद उसे शहरी लुक देने के चक्कर में लगी रहती है। वह मूंछे रखता था, उन्हें उसने कटवा दिया। इतना ही नहीं, टाई लगाने के लिए जोर देती है। कई बार वह लगा भी चुका है, लेकिन बार-बार उसके लिए यह सब करना बहुत मुश्किल है। गांव के माहौल में उसे यह सब करना बहुत अजीब लगता है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। परिवार परामर्श केंद्र के काउंसलरों के मुताबिक, दोनों पक्ष समझाने पर साथ रहने के राजी हो गए हैं। अब कुछ शर्तों के तहत ब्याहता को उसके ससुराल भेजा जाएगा।
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Monday, 28 July 2008
Thursday, 22 May 2008
हर तीसरा पुरूष घरेलू हिंसा का शिकार
आम तौर पर घरेलू हिंसा की बात आती है तो इसके शिकार के रूप में महिलाओं की ही छवि सामने आती है। लेकिन अमेरिका में हुए एक सर्वे के नतीजों पर नजर डालें तो यह धारणा बदल जाती है। सर्वे के मुताबिक अमेरिका के करीब एक-तिहाई पुरुष घरेलू हिंसा के शिकार है। यह अलग बात है कि महिलाओं के उलट, पुरुषों की यह पीड़ा सामने नहीं आ पाती। इस उत्पीड़न का पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।इस सर्वे में 400 लोगों की राय शामिल की गई। इनसे टेलीफोन पर सवाल-जवाब किए गए। साक्षात्कार में पांच प्रतिशत पुरुषों ने पिछले साल घरेलू हिंसा का शिकार होने की बात स्वीकारी, जबकि 10 फीसदी ने पिछले पांच सालों के दौरान और 29 फीसदी पुरुषों ने जीवन में कभी न कभी घरेलू हिंसा का शिकार होने की बात कबूल की। यह सर्वे राबर्ट जे रीड की अगुवाई में हुआ। रीड का कहना है कि पुरुष प्रधान समाज में घरेलू हिंसा के शिकार पुरुष शर्मिदगी महसूस करते है, क्योंकि समाज में उनको शक्तिशाली माना जाता है। वह बताते हैं कि घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों में युवाओं की संख्या कहीं ज्यादा है। 55 साल से अधिक उम्र वाले लोगों की तुलना में युवाओं की संख्या दोगुनी बताई गई है। रीड ने कहा कि इसका कारण है कि 55 से ऊपर के पुरूष घरेलू हिंसा के बारे में बात करने को तैयार नहीं होते हैं। अध्ययन ने इस भ्रम को भी गलत साबित कर दिया है कि घरेलू हिंसा के शिकार पुरूषों पर इसका कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ता। शोधकर्ताओं ने पाया कि घरेलू प्रताड़ना का शिकार पुरूषों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका काफी गंभीर प्रभाव पड़ता है।
सर्वे में घरेलू हिंसा के दायरे में धमकाना, अभद्र टिप्पणी, शारीरिक हिंसा-मारपीट या फिर यौन संबंध के लिए मजबूर करने करना आदि को शामिल किया गया था। अध्ययन रिपोर्ट ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ प्रीवेंटिव मेडिसिन’ के जून में आने वाले अंक में प्रकाशित किया जाएगा।
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