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Saturday, 28 June 2008

शादीशुदा लोगों से ज्यादा तलाकशुदा

शादी के लायक लोगों की संख्या बढ़ रही है, पर शादी करने की इच्छा रखने वालों की संख्या में कमी आ रही है। पिछले कुछ सालों में तलाक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि 16 वर्ष से अधिक आयु के ज्यादातर लोग या तो अकेले हैं, तलाकशुदा हैं या फिर अपने साथी को खो चुके हैं। ब्रिटेन में तलाकशुदा लोगों की संख्या शादीशुदा लोगों से अधिक है। हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़े यही साबित करते हैं। ऑफिस ऑफ नेशनल स्टेटिस्टिक्स (ओएनएस) के अनुसार वर्ष 2006 में इंग्लैंड और वेल्स में 2,36,980 शादियां हुईं, जो वर्ष 1895 से लेकर आज तक का न्यूनतम आंकड़ा है।

वर्ष 2005 के आंकड़ों के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स के शादीशुदा वयस्कों की संख्या घटकर 50.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। शादीशुदा जोड़ों की संख्या में वर्ष 1997 से लगातार गिरावट आ रही है और वर्ष 2006 तक शादीशुदा जोड़ों का अनुपात गिरकर आधे से भी कम रह गया है। हालांकि वर्ष 1995 में कुल जनसंख्या में शादीशुदा जोड़ों का आंकड़ा 56 प्रतिशत था। उसके बाद इसमें प्रतिवर्ष 1,00,000 से 1,50,000 की गिरावट आई। ओएनएस की रिपोर्ट के अनुसार इसका एक कारण अधिक उम्र में शादी होना भी है। हाल के अनुमान के मुताबिक शादीशुदा लोगों का अनुपात गिरेगा, लेकिन एक निश्चित अनुपात में लोग शादी भी करेंगे।

सिविटास थिंक टैंक के रॉबर्ट व्हेलान कहते हैं कि कम शादी होने के चलन में कोई कमी आती नहीं दिख रही है। भविष्य में बहुत ही कम लोग शादीशुदा जोड़े के रूप में साथ रहेंगे। इस चलन के बुरे प्रभाव खराब स्वास्थ्य, कम आमदनी, नशीली दवाओं, शराब का सेवन, अपराध तथा असामाजिक व्यवहार के रूप में नजर आते हैं। व्हेलान कहते हैं कि यह दुर्भाज्ञपूर्ण है कि सरकार में किसी को इस प्रवत्ति की कोई परवाह नहीं है।

Thursday, 10 April 2008

पति बढा़ते हैं, पत्नियों का काम

अगर आप सोचते हैं कि पतियों के कारण पत्नियों पर काम का बोझ बढ़ जाता है, या उन्हें घर में अधिक समय तक काम करना पड़ता है तो आप सही सोचते हैं। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई है। शोध में इस बात का खुलासा किया गया है कि शादीशुदा महिलाओं को अपने पतियों के कारण सप्ताह में औसतन सात घंटे घर का काम करना पड़ता है।

यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट फॉर सोशल रिसर्च (आईएसआर) विभाग के फ्रैंक स्टेफोर्ड ने कहा कि यह एक जाहिर सी बात है कि शादी के बाद बच्चे होने तक पुरुष बाहर के काम ज्यादा संभालते हैं, जबकि महिलाएं घर का काम संभालती हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए स्थिति उस समय और बुरी हो जाती है जब उनके बच्चे हो जाते हैं।

स्टेफोर्ड की अध्यक्षता में किया गया शोध वर्ष 2005 की टाइम-डायरी आंकड़ों पर आधारित हैं। ये आंकड़े इंस्टिट्यूट फॉर सोशल रिसर्च विभाग में वर्ष 1968 से किए गए अध्ययन से जुटाए गए। बहरहाल, शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने के लिए डायरियों का अध्ययन किया कि लोग किस तरह अपना समय व्यतीत करते हैं। शोधकर्ताओं ने पुरुषों और महिलाओं से यह सवाल किया कि वे खाना बनाने, साफ-सफाई और घर के आस-पास कुछ अन्य काम पर कितना समय बिताते हैं।

अब भी दिल न भरा हो तो बाक़ी रिपोर्ट भी देख ही लें।

Sunday, 23 March 2008

दुखी शादीशुदा जीवन से बेहतर है कुंवारापन!

रोज की खिटपिट और तनाव से भरी शादीशुदा जिंदगी से तो बेहतर है कि आप कुंवारे ही रहें। इससे आपकी सेहत बिगड़ने से बची रहेगी। यह खुलासा अमेरिका में किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन में हुआ है।

अध्ययन के मुताबिक, शादीशुदा जिंदगी आपके ब्लड प्रेशर के लिए अच्छी तभी हो सकती है, जब आप इससे खुश हों। ‘डेली मेल’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 204 शादीशुदा और 99 वयस्क कुंवारों का अनिश्चित अंतराल में दिन-रात का ब्लड प्रेशर नापा। इससे पता चला कि असंतुष्ट वैवाहिक जीवन जी रहे जोड़ों का ब्लड प्रेशर अनियमित होता है। ऐसे दंपतियों का ब्लड प्रेशर रात के समय अधिक हो जाता है, जो बाद में दिल की बीमारी का कारण भी बन जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, दूसरी ओर अकेले जिंदगी गुजारने वालों का ब्लड प्रेशर सुखी दंपतियों की तुलना में अधिक होता है।

उटाह की ब्रिंघम यंग यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि संतुष्ट वैवाहिक जीवन जी रहे दंपति अक्सर एक-दूसरे को डॉक्टर को दिखाते रहने या फिर स्वस्थ आहार लेने को प्रेरित करते हैं। वे तनाव के पलों में एक-दूसरे को भावनात्मक सहयोग भी देते हैं, जबकि ये चीजें तनावपूर्ण दांपत्य जीवन में या कुंवारों को उपलब्ध नहीं हो पातीं।