वहीं शाहीन का कहना था कि वह हर रोज केवल पांच गुलाब खरीदने का बोझ उठा सकता है। उसने जज से शिकायत की उसकी पत्नी के दिमाग में यह ख्याल उसकी अमीर दोस्त ने डाला है। इस बीच कोर्ट ने 1,24,000 गुलाब देने तक शाहीन का 25,84,960 रुपयों की कीमत वाला फ्लैट जब्त कर लिया है। गौरतलब है कि ईरान में एक लाल गुलाब की कीमत लगभग 81 रुपये है। ईरानी कानून के तहत कोई भी महिला अपना दहेज या महर वापस मांग सकती है। महर को निकाह के वक्त उसका शौहर इस शर्त पर स्वीकार करता है कि तलाक होने पर या शादीशुदा जिंदगी में कभी भी पत्नी के मांगे जाने पर वह उसे वापस कर देगा। ईरान में सोने के सिक्के या प्रॉपर्टी को महर के रूप में देने का चलन है। उल्लेखनीय है कि ईरान में पुरुषों को महर न लौटा पाने स्थिति में जेल तक हो सकती है।
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Tuesday, 4 March 2008
पत्नी को 1,24000 गुलाब देगा कंजूस पति!
वहीं शाहीन का कहना था कि वह हर रोज केवल पांच गुलाब खरीदने का बोझ उठा सकता है। उसने जज से शिकायत की उसकी पत्नी के दिमाग में यह ख्याल उसकी अमीर दोस्त ने डाला है। इस बीच कोर्ट ने 1,24,000 गुलाब देने तक शाहीन का 25,84,960 रुपयों की कीमत वाला फ्लैट जब्त कर लिया है। गौरतलब है कि ईरान में एक लाल गुलाब की कीमत लगभग 81 रुपये है। ईरानी कानून के तहत कोई भी महिला अपना दहेज या महर वापस मांग सकती है। महर को निकाह के वक्त उसका शौहर इस शर्त पर स्वीकार करता है कि तलाक होने पर या शादीशुदा जिंदगी में कभी भी पत्नी के मांगे जाने पर वह उसे वापस कर देगा। ईरान में सोने के सिक्के या प्रॉपर्टी को महर के रूप में देने का चलन है। उल्लेखनीय है कि ईरान में पुरुषों को महर न लौटा पाने स्थिति में जेल तक हो सकती है।
Saturday, 16 February 2008
प्यार के आगे कोमा भी हारा
कहते हैं कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती। लेकिन बात अगर कॉलेज के दिन हुए प्यार की हो, तो लोग अक्सर इसे संजीदगी से नहीं लेते। अक्सर कॉलेज के दिनों के प्यार को बचकाना और दिल बहलाना का जरिया माना जाता है। लेकिन 23 वर्षीय सनी पवार के लिए जिन्दगी का दूसरा पर्याय ही प्यार बन चुका है।
दरअसल, सनी की प्रेमिका आरती मकवान डेढ़ साल पहले गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गई थी और तब से कोमा (बेहोशी की नींद) में है। सनी कहते हैं कि आरती ढाई साल पहले एक आत्मनिर्भर और खुशमिजाज वाली लड़की थी, लेकिन आज आरती को 24 घंटे देखभाल की जरूरत है।
सनी कहते हैं कि, “मैंने आरती के साथ दुर्घटना के पहले सवा साल और बाद में सवा साल बिताए हैं। पहले के 15 महीनों में आरती के साथ गुजारे गए वक्त ने आज मुझे इतनी प्रेरणा और उसकी देखभाल करने की हिम्मत दी है”।
सनी दुर्घटना के पहले पढ़ाई करता था लेकिन आरती की देखभाल के लिए उसने पढ़ाई भी छोड़ दी। उसके खान-पान की देखभाल से लेकर रोजमर्रा की जरुरतों का ख्याल रखने वाला सनी फुर्सत के क्षणों में उसके साथ बातें भी करता है।
आरती की मां भारती मकवान एक आम प्रेमी से काफी आगे निकल चुके इस लड़के की कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना पर अचंभित हैं।
भारती कहती हैं कि, “वह हमारे घर का पुरुष सदस्य है और शादी से पहले ही मेरी बेटी का भरपूर ख्याल रख रहा है। सनी उसका प्रेमी ही नहीं, बल्कि पिता भी है”।
इन दिनों वित्तीय संकट और गहरे तनाव से गुजर रहा सनी आरती के बिस्तर के सामने की दीवार पर कविताएं और सकारात्मक संदेश लिखे हुए पन्ने चिपकाता रहता है।
भले ही यह जोड़ा शादीशुदा नहीं हो, लेकिन इतने विषम परिस्थितियों के बावजूद एक दूसरे का साथ दे रहा है। आरती के प्रति सनी की भावनाएं और सेवा भाव ने यह साबित कर दिया है कि प्रेम में प्रतिदान नहीं होता।
Tuesday, 12 February 2008
मिल सकता है तलाक, 'पाप' की आशंका पर
भारत की विख्यात इस्लामी संस्था दारुल उलूम देवबंद की फतवा जारी करने वाली इकाई दारुल इफ्ता ने हाल ही में एक महिला की फरियाद पर यह फतवा जारी किया है। केरल की रहने वाली इस महिला की शादी वहीं के व्यक्ति से हुई जो दुबई में कार्यरत है। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ ही दिन बाद पति और उसके घर वाले उसे पीटने और कई तरह के दुर्व्यवहार करने लगे। पत्नी ने इस पर तलाक की मांग की तो वह दुबई भाग गया।
नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, बरसों से बेबस जिंदगी जी रही इस महिला ने पिछले महीने दारुल इफ्ता में गुहार लगा कर पूछा कि विदेश भाग गए जालिम पति से कैसे छुटकारा पाकर नया जीवन शुरू करे। दारुल इफ्ता ने इस पर दिए फतवे में कहा कि किसी महिला को 2 परिस्थितियों में निकाहनामे को रद्द कर पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक देने पर बाध्य करने का अधिकार है। पहला यह कि अगर पति अपनी पत्नी को जीवन यापन का खर्चा नहीं देता है और दूसरा यह कि यदि पत्नी को यह डर महसूस होता हो कि पति के दूर रहने से वह अपनी स्वाभाविक शारीरिक जरूरतों के लिए ''पाप'' में घिर सकती है। पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक के लिए मजबूर करने के लिए ये 2 कारण ही काफी हैं।
'खुला' और तलाक में मुख्य अंतर यह है कि तलाक देने पर पुरुष को उसे गुजारा भत्ता देना होगा जबकि 'खुला' में वह इसके बाध्य नहीं है क्योंकि पत्नी संबंध विच्छेद के लिए पहल करती है। फतवे में कहा गया कि ऐसी सूरत में दूर रह रहा पति यदि तलाक देने से कतरा रहा हो तो पत्नी अपना मामला शरिया पंचायत में ले जा सकती है। पंचायत शिकायत सही पाने पर पति को तलाक देने के लिए बाध्य कर सकती है। इस पर भी यदि वह ऐसा नहीं करता है तो शरिया पंचायत 'मलिकी मसलक' के तहत निकाह को रद्द कर महिला को पति से मुक्ति दिला सकती है।
Monday, 28 January 2008
जनम जनम के फेरों में सात वचन
वर से लिए गए वचन
- ग़ृहस्थ जीवन में सुख-दुःख की स्थितियां आती रहती हैं, लेकिन तुम हमेशा अपना स्वभाव मधुर रखोगे।
- मुझे बताये बिना कुआँ - बावड़ी - तालाब का निर्माण, यज्ञ-महोत्सव का आयोजन और यात्रा नहीं करोगे।
- मेरे व्रत, दान और धर्म कार्यों में रोक-टोक नहीं करोगे।
- मेहनत से जो कुछ भी अर्जित करो, मुझे सौंपोगे।
- मेरी राय के बिना कोई भी चल-अचल सम्पति का क्रय-विक्रय नहीं करोगे।
- घर की सभी कीमती चीजें, गहने, आभूषण मुझे रखने के लिए दोगे।
- माता-पिता के किसी आयोजन में मेरे जाने पर आपत्ति नहीं करोगे।
- मेरी अनुपस्थिति में कहीं नहीं जायोगी।
- विष्णु, वैश्वानर, ब्राह्मण, मेहमान और परिजन सभी साक्षी हैं कि मैं तुम्हारा हो चुका हूँ।
- मेरे मन में तुम्हारा मन रहे। तुम्हारी बातों में मेरी बातें रहें और मुझे अपने ह्रदय में रखोगी
- मेरी इच्छायोँ और आज्ञायोँ का निरादर नहीं करोगी और बडों का सम्मान करोगी।
- हमेशा मेरी विश्वसनीय बनी रहोगी।
Wednesday, 23 January 2008
जीवनसाथी से नोकझोंक भी जरूरी
अपने जीवन साथी के प्रति गुस्से का इजहार और उसका समाधान ढूंढ निकालने वाले लोगों की अपेक्षा उन दंपतियों की उम्र छोटी होती है जो अपने गुस्से को दबा देते हैं। इस नतीजे पर पहुंचे हैं मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता। पिछले 17 वर्षो के दौरान शोधकर्ताओं की टीम ने 192 दंपतियों पर नजर रखी। इन दंपतियों को चार श्रेणियों में बांटा। पहली श्रेणी में ऐसे पति-पत्नी को शामिल किया गया जो एक-दूसरे के प्रति गुस्से का इजहार कर दिया करते थे। दूसरी व तीसरी श्रेणी में उन पति-पत्नी को रखा गया, जिनमें कोई एक अपना गुस्सा खोल देता था और दूसरा दबाए रखता था। चौथी श्रेणी में उन पति-पत्नियों को रखा गया जो अपने गुस्से और विचारों को जाहिर करते ही नहीं थे।
इस संबंध में प्रमुख शोधकर्ता अर्नेस्ट हारबर्ग के मुताबिक उनकी टीम का अध्ययन बताता है कि गुस्से को दबाने वाले दंपतियों के मुकाबले एक-दूसरे पर गुस्सा जाहिर करने और सुलह की राह अख्तियार करने वाले दंपति ज्यादा दीर्घजीवी होते हैं। वैसे तो कोई भी इसके लिए प्रशिक्षित नहीं होता, लेकिन जिनके माता-पिता अच्छे होते हैं, वे उनकी अच्छाइयों का अनुकरण कर इस रास्ते को अख्तियार कर सकते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है कि मनमुटाव किस दौर में हुआ और आपने कैसे उसे सुलझा लिया गया।
हारबर्ग के मुताबिक जब हमारे सामने समाधान का रास्ता नहीं होता तो अपने गुस्से को दबा लेते हैं। अपनी बात नहीं रखते, यहीं से शुरुआत होती है समस्या की। अध्ययन में शामिल 192 दंपतियों में 26 ऐसे थे, जो अपने उबलते गुस्से को अंदर ही अंदर दबा देते थे, इस समूह में 13 की अध्ययन के दौरान ही मौत हो गई। शेष बचे 166 दंपतियों में 41 की मौत मिश्रित रही। यानी किसी की पत्नी किसी का पति। हारबर्ग के मुताबिक अध्ययन में धूम्रपान, वजन, ब्लड प्रेशर, श्वास और दिल की बीमारियों जैसे कारकों को भी समायोजित किया गया है।
Sunday, 20 January 2008
वश में हो, तो तलाक ले लेंगी ज्यादातर महिलाएं
शादीशुदा पुरुषों और महिलाओं पर सर्वे में 59 फीसदी महिलाओं ने कहा कि अगर भविष्य में आर्थिक सुरक्षा तय हो, तो तुरंत तलाक ले लेंगी। महिलाओं और पुरुषों दोनों में 10 में से एक का कहना था कि काश मैंने किसी और से शादी की होती। सर्वे के मुताबिक, आधे से ज्यादा पति अपनी शादीशुदा जिंदगी में प्यार का अभाव मानते हैं।
इस सर्वे में 2000 वयस्क ब्रिटिश शामिल किए गए। इनमें करीब 30 फीसदी ने अपनी शादी को नाकाम माना और कहा कि अचानक जिंदगी में उथल-पुथल से बचने के लिए शादी के बंधन को निभा रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों में करीब आधे ने कहा कि परिवार को बिखरने से बचाने के लिए हम साथ रह रहे हैं। 30 फीसदी पुरुषों का कहना था कि हम अपने बच्चों की खातिर साथ रह रहे हैं। 56 फीसदी लोगों ने माना कि अपने वैवाहिक रिश्तों से पूरी तरह खुश नहीं हैं। आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि हमने तलाक लेने पर विचार किया था।
Sunday, 13 January 2008
टीवी देखने से रोकने पर पिटे पतिदेव
मीरापुर बसहीं (शिवपुर), उत्तर प्रदेश में एक पति द्वारा अपनी पत्नी को टीवी देखने से रोकने पर ११ जनवरी की देर रात बवाल हो गया। बात इतनी बढ़ी कि पति घर छोड़कर भाग गया।
बताया जाता है कि पति पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है। वह शुक्रवार की रात तकरीबन बारह बजे घर आया। उस समय पत्नी टीवी देख रही थी। काफी रात होने के बाद पति ने कई बार कहा कि टीवी बंद कर दो। सुबह काम पर जाना है। पत्नी ने उसकी बातों को अनसुनी कर दिया। देर रात झल्लाए पति ने टीवी बंद कर दिया। मामला 'रात' में ही बिगड़ गया। टीवी बंद होते ही पत्नी ने आव देखा न ताव, एक थप्पड़ पति को जड़ दिया। इससे स्तब्ध पति ने भी अपना गुस्सा निकाला। इस पर आपे से बाहर हो चुकी पत्नी ने अपने मायके फोन कर सारी बात बताई। रातोरात मायके से एक दर्जन लोग आ गए।
बात बढ़ती देखकर पति घर से फरार हो गया। मामला रात में ही पुलिस के यहां पहुंच गया। मायकेवाले शनिवार को सवेरे अपनी बेटी को पहले पुलिस चौकी पर लाए और दहेज उत्पीड़न के संबंध में एक प्रार्थनापत्र दे दिया। फिर बेटी को लेकर मीरजापुर चले गये। युवती के मां-पिता का कहना है कि बेटी को सताया जा रहा है। पति पक्ष के अनुसार मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की शादी 26 अप्रैल 2007 को हुई थी।
