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Thursday, 20 March 2008

यादें, याद आती हैं

किसी के जिंदगी से निकल जाने के बाद हम उससे जुड़ी हर चीज से मुंह मोड़ने लगते हैं। लेकिन क्या आप इसके लिए अपने घर, कार, जॉब और यहां तक कि अपने दोस्तों से भी पीछा छुड़ाना चाहेंगे? पड़ गए सोच में, लेकिन ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया में जा कर बसे इयान अशर कुछ ऐसा ही करने वाले हैं।

एक साल से ज्यादा समय हो गया जब इयान और उनकी बीवी पांच साल साथ रहने के बाद अलग हुए। लेकिन वे मानते है कि आज भी उनकी जिंदगी की हर चीज, यहां तक कि फर्नीचर भी उन्हें उस रिश्ते की याद दिलाते हैं। इसलिए उन्होंने अपना सबकुछ ऑनलाइन सेल के लिए रख दिया है। इयान के शब्दों में, 'जिस दिन यह सब बिक जाएगा, मैं घर से सिर्फ एक पर्स और पासपोर्ट लेकर निकल जाऊंगा।'

सेल में उनका पर्थ में स्थित तीन बेडरूम वाला घर और उसके भीतर रखी सारी चीजें यहां तक कि कार, मोटरसाइकल, जेट स्की और पैराशूटिंग गियर भी होगा। सेल के मुताबिक वे अपने दोस्तों से एक बार परिचय कराकर, अपने जॉब पर ट्रायल का मौका देकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करने दुनिया की सैर पर निकल जाएंगे, जिसमें इंग्लैंड में रह रही अपनी मां से मिलना भी शामिल है।

समाचार को यहाँ देखा जा सकता है। अगर आप भी बोली लगाना चाहते हैं तो उनकी वेबसाईट पर जाएँ.

Monday, 17 March 2008

इंटरनेट से तलाक मान्य नहीं

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने महिला और पुरुषों को समान अधिकार दिए जाने को लेकर कुरान के हिसाब से नया निकाहनामा जारी किया है। इसके अनुसार 'तीन बार तलाक' कहने मात्र से ही तलाक नहीं होगा।

मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने ईमेल, एसएमएस, फोन और इंटरनेट से होने वाले तलाक को भी मानने से इनकार किया है तथा कहा है कि अब तलाक के लिए पति और पत्नी को तीन माह का समय दिया जाएगा कि वे इस बीच अपने विवाद खत्म कर लें। यदि इस अवधि में भी विवाद खत्म नहीं होता तो ही तलाक होना माना जाएगा। इन तीन महीने के दौरान पति- पत्नी साथ रहेंगे।

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि इस नए निकाहनामे में महिला और पुरुष को बराबर के अधिकार दिए गए हैं। निकाह के साथ ही एक फार्म भी भरा जाएगा जो मैरेज ब्यूरो में जमा होगा तथा इस पर पति-पत्नी और काजी के हस्ताक्षर होंगे। किसी तरह का विवाद होने पर यह एक कानूनी दस्तावेज होगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाईस्ता अम्बर ने कहा कि यह ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जारी किए गए मॉडल निकाहनामे से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि कुरान में भी महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि मॉडल निकाहनामा उर्दू में है, जबकि इस नए निकाहनामे को उर्दू के साथ हिन्दी में भी जारी किया गया है, ताकि यह सामान्य लोगों की समझ में आ सके या वैसी मुस्लिम महिलाओं को भी जानकारी हो सके, जिन्होंने उर्दू की शिक्षा नहीं ली है।

नए निकाहनामे में शरीयत के हिसाब से शौहर और पत्नी के लिए निकाह के वास्ते ।7 हिदायतें दी गई हैं तथा 8 हिदायतें तलाक के लिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हिदायत जबरन शादी को लेकर है। शरीयत कानून के हिसाब से जबरन शादी को मान्यता नहीं दी गई है। निकाह दोनों पक्षों के अलावा पति और पत्नी की आपसी सहमति से बेहतर भविष्य के लिए है।

Wednesday, 12 March 2008

पत्नी की डांट ने बनाया नपुंसक

भई एक ख़बर आयी है, विश्लेषण आप ही करें, बेहतर होगा। इटली के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी पर एक लाख 40 हजार पॉन्ड का दावा ठोंका है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी उसे हमेशा डांटती रहती है। इस डांट-फटकार के चलते उसे तनाव हो गया और इस गहरे तनाव ने उसे नपुंसक बना दिया।

इस व्यक्ति ने कोर्ट में कुछ ऐसे दस्तावेज पेश किए हैं, जो यह साबित करते हैं कि पत्नी की हर वक्त की फटकार और शिकायतों के चलते ही वह नपुंसक हो।
(बस इतनी ही ख़बर मिल पायी है, आगे क्या हुया, ढूंढ रहा हूँ।)

Saturday, 8 March 2008

पति-पत्नी के बीच दरार किसने डाली!?

बिस्तर कभी पति-पत्नी के बीच की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का काम करता है, तो कभी जिंदगी अपने दोनों पहियों के सहारे सरपट दौड़ती है। लेकिन अब पति-पत्नी के बीच किसी तीसरे ने घुसपैठ कर ली है। नतीजा- कभी सोने के घंटे अलग, तो कभी बिस्तर अलग। पता चला है कि हमारे पसंदीदा गैजेट्स मसलन टीवी, ऑडियो सिस्टम और कंप्यूटर ही बिस्तर बांटने के लिए जिम्मेदार हैं। दिलचस्प बात ये है कि रिश्तों में दरार डालने वाले इस घुसपैठिए को हम बड़े शौक से अपनी गाढ़ी कमाई खर्च कर घर लाते हैं।

बिस्तर पर पहुंचते ही जिंदगी का एक चक्कर पूरा हो जाता है। दिन भर की थकान और नींद के बीच डूबते उतराते हैं कल के सपने और योजनाएं और अगर शादीशुदा लोगों की बात करें तो ये सिर्फ बेड शेयर करने का मामला ही नहीं है। ब्रिटेन में रिसर्चरों ने पता लगाया है कि हाई टेक गैजेट्स की वजह से लाखों कपल अपना बेड अलग करने के लिए मजबूर हैं। 'स्लीप काउंसिल' से जुड़ी जेसिका ऐलेक्जेंडर के मुताबिक स्टडी से साबित हुआ है कि बेडरूम अब सोने की जगह नहीं रह गया। जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे टीवी, फोन और कंप्यूटर की घुसपैठ के कारण बेडरूम कम्यूनिकेशन हब में तब्दील हो गए हैं।

आंख खोलने वाली इस स्टडी के लिए ब्रिटेन में 1,400 लोगों के बीच स्टडी की गई। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि 10 फीसदी लोग हर रात अलग बिस्तर पर सोते हैं, 25 फीसदी अकसर अलग बिस्तर पर सोते हैं और 40 फीसदी लोगों का उनके पार्टनर के साथ सोने का टाइम मैच नहीं करता।

बीबीसी की ख़बर में बताया गया है कि तकरीबन हर बेडरूम में गैजेट के नाम पर तकिए के नीचे या साइड टेबल पर मोबाइल फोन निश्चित होता है। लगभग 22 फीसदी लोग अलार्म क्लॉक की जगह मोबाइल फोन के जरिए अपनी गुड मॉर्निंग करते हैं। एक तिहाई लोग बिस्तर पर लेटने के बाद फोन पर बात करने मेसेज भेजने या चैट करने में मशगूल रहते हैं। 20 फीसदी लोग तो बेड पर पहुंचने के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट खंगालने, कंप्यूटर गेम खेलने या कान में हेडफोन लगाकर गाना सुनने में मशगूल रहते हैं। सोने से पहले भगवान की प्रार्थना करने वाले जहां 10 फीसदी हैं, वहीं रिलैक्स करने से ठीक पहले गैजेट्स को चार्जिंग पर लगाने वाले 22 फीसदी। सोने से ठीक पहले कुछ न पीने की सलाह शायद ही किसी के पल्ले पड़ती हो। हर तीसरा आदमी सोने से पहले पानी पीता है। ऐसे भी लोग हैं जो सोने से पहले नींद भगाने वाली कॉफी का सेवन कर लेते हैं। बेड पर पसरकर शराब या शर्बत पीने वालों की भी कमी नहीं है।

जमाने के जेट की रफ्तार से बदलने के बावजूद कुछ चीजें अब भी नहीं बदली हैं। ज्यादातर महिलाओं के लिए पाजामा अब भी सोते समय पहना जाने वाला पसंदीदा और आरामदायक परिधान है। कपड़ों की ही बात करें तो कुछ अजीबोगरीब तथ्यों से भी सामना होता है। महिलाओं के मुकाबले लगभग दोगुने अनुपात में पुरुष सोते समय कोई भी कपड़ा पहनना पसंद नहीं करते। एक फीसदी पुरुषों का तो ये भी दावा है कि वे नाइटी पहनकर सोते हैं।

रिसर्चरों का दावा है कि उनकी स्टडी आज की टेक लाइफ के बेडरूम इफेक्ट का असली असर लोगों के सामने पेश कर रही है। बहरहाल, अब वक्त आ गया है, जब बेडरूम को सिर्फ सोने का कमरा बना रहने दिया जाए और जिंदगी की भागदौड़ को बाहर कर दरवाजा बंद कर लिया जाए ताकि नाइट गुड हो सके।

Tuesday, 4 March 2008

पत्नी को 1,24000 गुलाब देगा कंजूस पति!

ईरानी कोर्ट ने एक व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह अपनी पत्नी को 1,24,000 गुलाब खरीद कर दे। कंजूस पति से परेशान पत्नी ने अपने पति से यह मांग दहेज वापसी के तौर पर की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हेंगामेह ने शादी के 10 सालों के बाद अपने कंजूस पति को सबक सिखाने के लिए यह अनोखी तरकीब खोजी। उसने कहा- शादी के कुछ समय के बाद ही मुझे पता चल गया था कि शाहीन बहुत घटिया इंसान है। अगर हम कभी किसी कैफे या रेस्तरां में जाते थे तो वह मेरी कॉफी तक के पैसे नहीं चुकाता था।

वहीं शाहीन का कहना था कि वह हर रोज केवल पांच गुलाब खरीदने का बोझ उठा सकता है। उसने जज से शिकायत की उसकी पत्नी के दिमाग में यह ख्याल उसकी अमीर दोस्त ने डाला है। इस बीच कोर्ट ने 1,24,000 गुलाब देने तक शाहीन का 25,84,960 रुपयों की कीमत वाला फ्लैट जब्त कर लिया है। गौरतलब है कि ईरान में एक लाल गुलाब की कीमत लगभग 81 रुपये है। ईरानी कानून के तहत कोई भी महिला अपना दहेज या महर वापस मांग सकती है। महर को निकाह के वक्त उसका शौहर इस शर्त पर स्वीकार करता है कि तलाक होने पर या शादीशुदा जिंदगी में कभी भी पत्नी के मांगे जाने पर वह उसे वापस कर देगा। ईरान में सोने के सिक्के या प्रॉपर्टी को महर के रूप में देने का चलन है। उल्लेखनीय है कि ईरान में पुरुषों को महर न लौटा पाने स्थिति में जेल तक हो सकती है।

Saturday, 16 February 2008

प्यार के आगे कोमा भी हारा

पहले तो मुझे लगा कि इस ब्लॉग के शीर्षक में एक शब्द और जोड़ दूँ - 'प्रेम' या 'प्यार', फिर लगा कि नहीं जिस ख़बर की चर्चा करने जा रहा हों, वह बिरली ही सामने आ पाती हैं।

कहते हैं कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती। लेकिन बात अगर कॉलेज के दिन हुए प्यार की हो, तो लोग अक्सर इसे संजीदगी से नहीं लेते। अक्सर कॉलेज के दिनों के प्यार को बचकाना और दिल बहलाना का जरिया माना जाता है। लेकिन 23 वर्षीय सनी पवार के लिए जिन्दगी का दूसरा पर्याय ही प्यार बन चुका है।

दरअसल, सनी की प्रेमिका आरती मकवान डेढ़ साल पहले गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गई थी और तब से कोमा (बेहोशी की नींद) में है। सनी कहते हैं कि आरती ढाई साल पहले एक आत्मनिर्भर और खुशमिजाज वाली लड़की थी, लेकिन आज आरती को 24 घंटे देखभाल की जरूरत है।

सनी कहते हैं कि, “मैंने आरती के साथ दुर्घटना के पहले सवा साल और बाद में सवा साल बिताए हैं। पहले के 15 महीनों में आरती के साथ गुजारे गए वक्त ने आज मुझे इतनी प्रेरणा और उसकी देखभाल करने की हिम्मत दी है”।

सनी दुर्घटना के पहले पढ़ाई करता था लेकिन आरती की देखभाल के लिए उसने पढ़ाई भी छोड़ दी। उसके खान-पान की देखभाल से लेकर रोजमर्रा की जरुरतों का ख्याल रखने वाला सनी फुर्सत के क्षणों में उसके साथ बातें भी करता है।

आरती की मां भारती मकवान एक आम प्रेमी से काफी आगे निकल चुके इस लड़के की कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना पर अचंभित हैं।

भारती कहती हैं कि, “वह हमारे घर का पुरुष सदस्य है और शादी से पहले ही मेरी बेटी का भरपूर ख्याल रख रहा है। सनी उसका प्रेमी ही नहीं, बल्कि पिता भी है”।

इन दिनों वित्तीय संकट और गहरे तनाव से गुजर रहा सनी आरती के बिस्तर के सामने की दीवार पर कविताएं और सकारात्मक संदेश लिखे हुए पन्ने चिपकाता रहता है।

भले ही यह जोड़ा शादीशुदा नहीं हो, लेकिन इतने विषम परिस्थितियों के बावजूद एक दूसरे का साथ दे रहा है। आरती के प्रति सनी की भावनाएं और सेवा भाव ने यह साबित कर दिया है कि प्रेम में प्रतिदान नहीं होता।

Tuesday, 12 February 2008

मिल सकता है तलाक, 'पाप' की आशंका पर

महिला के पक्ष में जारी एक फतवे में कहा गया है कि यदि कोई शख्स अपनी पत्नी के साथ नहीं रह रहा है और पत्नी को लगता है कि अपनी स्वाभाविक जरूरतों के लिए मैं 'पाप' में घिर सकती हूं, तो वह तलाक यानी 'खुला' ले सकती है।

भारत की विख्यात इस्लामी संस्था दारुल उलूम देवबंद की फतवा जारी करने वाली इकाई दारुल इफ्ता ने हाल ही में एक महिला की फरियाद पर यह फतवा जारी किया है। केरल की रहने वाली इस महिला की शादी वहीं के व्यक्ति से हुई जो दुबई में कार्यरत है। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ ही दिन बाद पति और उसके घर वाले उसे पीटने और कई तरह के दुर्व्यवहार करने लगे। पत्नी ने इस पर तलाक की मांग की तो वह दुबई भाग गया।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, बरसों से बेबस जिंदगी जी रही इस महिला ने पिछले महीने दारुल इफ्ता में गुहार लगा कर पूछा कि विदेश भाग गए जालिम पति से कैसे छुटकारा पाकर नया जीवन शुरू करे। दारुल इफ्ता ने इस पर दिए फतवे में कहा कि किसी महिला को 2 परिस्थितियों में निकाहनामे को रद्द कर पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक देने पर बाध्य करने का अधिकार है। पहला यह कि अगर पति अपनी पत्नी को जीवन यापन का खर्चा नहीं देता है और दूसरा यह कि यदि पत्नी को यह डर महसूस होता हो कि पति के दूर रहने से वह अपनी स्वाभाविक शारीरिक जरूरतों के लिए ''पाप'' में घिर सकती है। पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक के लिए मजबूर करने के लिए ये 2 कारण ही काफी हैं।

'खुला' और तलाक में मुख्य अंतर यह है कि तलाक देने पर पुरुष को उसे गुजारा भत्ता देना होगा जबकि 'खुला' में वह इसके बाध्य नहीं है क्योंकि पत्नी संबंध विच्छेद के लिए पहल करती है। फतवे में कहा गया कि ऐसी सूरत में दूर रह रहा पति यदि तलाक देने से कतरा रहा हो तो पत्नी अपना मामला शरिया पंचायत में ले जा सकती है। पंचायत शिकायत सही पाने पर पति को तलाक देने के लिए बाध्य कर सकती है। इस पर भी यदि वह ऐसा नहीं करता है तो शरिया पंचायत 'मलिकी मसलक' के तहत निकाह को रद्द कर महिला को पति से मुक्ति दिला सकती है।