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Wednesday, 14 May 2008

पतियों के हाथों महिलायें क्यों पिटती हैं? सरकार भी जानना चाहती है

आख़िर सरकार ने मान लिया है कि राष्ट्रीय महिला आयोग, महिलाओं पर लगातार बढ़ रहे जुल्म-ओ-सितम को रोकने में बहुत कारगर भूमिका निभा पाने में नाकाम रहा है। अब, राष्ट्रीय महिला आयोग को सरकार और अधिकार संपन्न बनाएगी। इसके लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। साथ ही महिलाओं पर जुल्म की मूल वजहों को जानने और उनके प्रति पुरुषों के नजरिये में बदलाव लाने के मद्देनजर सरकार जल्द ही एक गोलमेज सम्मेलन भी करेगी। इसमें पत्नी पीड़ित पतियों की भी बातें सुनी जाएंगी।

महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री [स्वतंत्र प्रभार] रेणुका चौधरी ने पिछले दिनों राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में सदन को यह जानकारी दी। एक सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि महिलाओं को लेकर पुरुषों की भी अपनी समस्याएं हैं। साथ ही उनकी सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। इसके बगैर सकारात्मक नतीजे नहीं आ सकते। लिहाजा उनका मंत्रालय एक गोलमेज सम्मेलन कराने की तैयारी कर रहा है। सम्मेलन में महिलाओं के साथ पत्नी पीड़ित पतियों, सामाजिक मनोविज्ञानियों और दूसरे प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। मकसद यह भी जानने का है कि पतियों के हाथ महिलाओं की पिटाई की आखिर मूल वजहें क्या हैं?