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Thursday, 10 April 2008

पति बढा़ते हैं, पत्नियों का काम

अगर आप सोचते हैं कि पतियों के कारण पत्नियों पर काम का बोझ बढ़ जाता है, या उन्हें घर में अधिक समय तक काम करना पड़ता है तो आप सही सोचते हैं। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई है। शोध में इस बात का खुलासा किया गया है कि शादीशुदा महिलाओं को अपने पतियों के कारण सप्ताह में औसतन सात घंटे घर का काम करना पड़ता है।

यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट फॉर सोशल रिसर्च (आईएसआर) विभाग के फ्रैंक स्टेफोर्ड ने कहा कि यह एक जाहिर सी बात है कि शादी के बाद बच्चे होने तक पुरुष बाहर के काम ज्यादा संभालते हैं, जबकि महिलाएं घर का काम संभालती हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए स्थिति उस समय और बुरी हो जाती है जब उनके बच्चे हो जाते हैं।

स्टेफोर्ड की अध्यक्षता में किया गया शोध वर्ष 2005 की टाइम-डायरी आंकड़ों पर आधारित हैं। ये आंकड़े इंस्टिट्यूट फॉर सोशल रिसर्च विभाग में वर्ष 1968 से किए गए अध्ययन से जुटाए गए। बहरहाल, शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने के लिए डायरियों का अध्ययन किया कि लोग किस तरह अपना समय व्यतीत करते हैं। शोधकर्ताओं ने पुरुषों और महिलाओं से यह सवाल किया कि वे खाना बनाने, साफ-सफाई और घर के आस-पास कुछ अन्य काम पर कितना समय बिताते हैं।

अब भी दिल न भरा हो तो बाक़ी रिपोर्ट भी देख ही लें।

Monday, 7 April 2008

पिछले तीन दशकों में पुरुषों का कार्यभार दोगुना हुया है!

अमेरिका में हाल ही में किए गए शोध के अनुसार घरेलू कामकाज में जहां महिलाओं के कार्यभार में तीस फीसदी गिरावट दर्ज की गई है वहीं पुरुषों पर काम का बोझ दोगुना बढ़ गया है। अमेरिका में हाल ही में किए गए एक अध्ययन में इसका खुलासा किया गया। अमेरिका में 1976 से 2005 के बीच किए गए अध्ययन में कहा गया है कि प्रति सप्ताह महिलाओं द्वारा घरेलू कामकाज किए जाने के घंटों में कमी हुई है जबकि पुरुषों में काम करने के घंटों में वृध्दि दर्ज की गई।


मिसिगन विश्वविद्यालय के शोधार्थियों द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि महिलाओं के काम के घंटे में भारी गिरावट दर्ज हुई। पहले जहां महिलाएं हफ्ते में 26 घंटे काम करती थी वहीं अब घटकर 17 घंटे पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर पुरुषों पर काम का भार छह घंटे से 13 घंटे की वृध्दि हुई है। अध्ययन में कहा गया है कि घरेलू कामकाज में भी महिलाओं का कार्यभार घटा है। इसमें कहा गया है कि शादी से पहले जहां पुरुष या महिलाओं को काम कम करना पड़ता है वहीं शादी के बाद कार्य अवधि में वृध्दि हो जाती है।

Sunday, 6 April 2008

कभी देखा है, ऐसा बंटवारा!?

सर्बिया के एक 76 साल के किसान ने कोर्ट के फरमान के बाद अपनी पत्नी के साथ अजीबोगरीब ढंग से जायदाद का बंटवारा किया। कोर्ट ने बंटवारे के लिए कहा, तो इस शख्स ने ग्राइंडिंग मशीन से खेती के अपने सभी औजारों को आधा काटकर बीवी को दे दिया।

ब्रैंको जिकोव नामक इस किसान ने कहा कि मैं अपनी 45 साल की शादीशुदा जिंदगी में कमाई हर चीज में बीवी को बराबर हिस्सा देना चाहता हूं। लेकिन खेती के औजार भी बांटने को कहा गया, तो वह भड़क उठा। इसके बाद उसने इन सभी औजारों को दो हिस्से में काट दिया। इनमें जुताई, बुआई और पशुपालन में इस्तेमाल किए जाने वाले औजार भी शामिल थे।

Saturday, 29 March 2008

नहीं भा रहा दांपत्य जीवन, नवविवाहितों को!

ब्रिटेन में पिछले बीस साल पहले तलाक दर 37 प्रतिशत से बढ़कर 45 फीसदी पहुंच गई है, जिससे यहां तलाक लेने वालों की संख्या पचास प्रतिशत हो गई है मतलब ब्रिटेन में नई शादी करने वाले हर दो दंपतियों में से एक दंपति तलाक ले लेता है।

ब्रिटिश राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार शादी के एक दशक बाद तलाक का जोखिम कम हो जाता है और 31 फीसदी तलाक की घटनाएं शादी के दस साल बाद ही होती हैं, जबकि पंद्रह प्रतिशत घटनाएं शादी के बीस साल बाद होती हैं। कार्यालय ने यह आंकडे़ एक वेबसाईट पर आयी रिपोर्ट , जिसमें तलाक की दरों में रिकार्ड कमी बताई गई थी, के एक दिन बाद जारी किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 45 फीसदी शादियां अपनी शादी की 50वीं सालगिरह मनाने से पहले ही टूट जाती है तथा इनमें से आधी दस साल से पहले टूट जाती है।

पहले तलाक ले चुके और किशोरावस्था के लोगों में तलाक लेने की प्रवृत्ति ज्यादा है। सामाजिक नीति केंद्र के डान बाउचर ने कहा कि अगर सरकार शादी का पंजीकरण कर प्रणाली के तहत कर दिया जाए तो शादी के संबंध को टूटने से रोकने में मदद मिलेगी।

Friday, 28 March 2008

घर-परिवार की परिभाषा बदली, अविवाहित महिलाओं ने

आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिलाएं आमतौर पर देर से विवाह करने की इच्छा रखती है लेकिन आस्ट्रेलियाई समाज में हो रहे बदलाव दिखाते है कि अविवाहित महिलाओं ने घर और रिश्तों की परिभाषा को ही बदल दिया है। 'पैसिफिक माइक्रोमार्केटिंग' नामक अनुसंधान संस्था के अनुसार ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जीवन भर अविवाहित रहने का फैसला कर रही है। ऐसे में बाजार और सरकार दोनों को यह स्वीकार करना होगा कि घर का मतलब अब पति-पत्‍‌नी और बच्चे नहीं रह गया है।

समाचार एजेंसी डीपीए ने जनसंख्या विशेषज्ञों द्वारा उपलब्ध करवाए गए आंकड़ों के हवाले से बताया कि आस्ट्रेलिया की 51 फीसदी महिलाएं अविवाहित है और एक-चौथाई से ज्यादा महिलाएं कभी गर्भधारण न करने का फैसला कर चुकी हैं। शोधकर्ता बॉब बिरैल के अनुसार, 'नए दौर की महिलाएं चाहती है कि वह ऐसे पुरुष के साथ रहे जो रिश्ता निभाने के लिए समझौते करने को भी तैयार हो।' यह मनोवृत्ति महिलाओं को एकल जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित करती है और पुरुषों के लिए परेशानी का सबब बनती है।

Monday, 24 March 2008

पति ने पैर नहीं धोए, पत्नी ने जला डाला

चीन में एक नव विवाहिता ने नशे की हालत में अपने पति को सिर्फ इसलिए आग के हवाले कर मार डाला क्योंकि वह बिना पैर धोये बिस्तर पर चला गया। समाचार एजेंसी शिंहुआ के अनुसार हुबेई प्रांत के नवदंपत्ति वांग और लू ने गत दो फरवरी को ही शादी की थी और शादी के बाद से इनमें जबरदस्त नोंकझोंक शुरू हो गई थी। इतना ही नहीं हनीमून के दौरान भी इनके लड़ने की शिकायतें प्रशासन को मिली।

गत चार मार्च को पति पत्नी के बीच हुए झगड़े से उत्पन्न तनाव को दूर करने के लिए दोनों ने जमकर शराब पी ली। रात को 10 बजे नशे में धुत पत्नी ने देखा कि पति बिना पैर धोये बिस्तर पर सो रहा है। फिर क्या था, यह देखकर पत्नी गुस्से में इतनी आगबबूला हो गई कि उसने सोते पति के बिस्तर में आग लगा दी।

आग के कारण नींद खुलने पर पति वांग उठा और फिर पत्नी से लड़ने लगा लेकिन नशे की वजह से जलते बिस्तर में ही गिर गया और हमेशा के लिए सो गया। पत्नी उसे जलता छोड़ दूसरे कमरे में चली गयी और फिलहाल पुलिस की हिरासत में है।

Sunday, 23 March 2008

दुखी शादीशुदा जीवन से बेहतर है कुंवारापन!

रोज की खिटपिट और तनाव से भरी शादीशुदा जिंदगी से तो बेहतर है कि आप कुंवारे ही रहें। इससे आपकी सेहत बिगड़ने से बची रहेगी। यह खुलासा अमेरिका में किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन में हुआ है।

अध्ययन के मुताबिक, शादीशुदा जिंदगी आपके ब्लड प्रेशर के लिए अच्छी तभी हो सकती है, जब आप इससे खुश हों। ‘डेली मेल’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 204 शादीशुदा और 99 वयस्क कुंवारों का अनिश्चित अंतराल में दिन-रात का ब्लड प्रेशर नापा। इससे पता चला कि असंतुष्ट वैवाहिक जीवन जी रहे जोड़ों का ब्लड प्रेशर अनियमित होता है। ऐसे दंपतियों का ब्लड प्रेशर रात के समय अधिक हो जाता है, जो बाद में दिल की बीमारी का कारण भी बन जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, दूसरी ओर अकेले जिंदगी गुजारने वालों का ब्लड प्रेशर सुखी दंपतियों की तुलना में अधिक होता है।

उटाह की ब्रिंघम यंग यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि संतुष्ट वैवाहिक जीवन जी रहे दंपति अक्सर एक-दूसरे को डॉक्टर को दिखाते रहने या फिर स्वस्थ आहार लेने को प्रेरित करते हैं। वे तनाव के पलों में एक-दूसरे को भावनात्मक सहयोग भी देते हैं, जबकि ये चीजें तनावपूर्ण दांपत्य जीवन में या कुंवारों को उपलब्ध नहीं हो पातीं।