समाचार एजेंसी डीपीए ने जनसंख्या विशेषज्ञों द्वारा उपलब्ध करवाए गए आंकड़ों के हवाले से बताया कि आस्ट्रेलिया की 51 फीसदी महिलाएं अविवाहित है और एक-चौथाई से ज्यादा महिलाएं कभी गर्भधारण न करने का फैसला कर चुकी हैं। शोधकर्ता बॉब बिरैल के अनुसार, 'नए दौर की महिलाएं चाहती है कि वह ऐसे पुरुष के साथ रहे जो रिश्ता निभाने के लिए समझौते करने को भी तैयार हो।' यह मनोवृत्ति महिलाओं को एकल जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित करती है और पुरुषों के लिए परेशानी का सबब बनती है।
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Friday, 28 March 2008
घर-परिवार की परिभाषा बदली, अविवाहित महिलाओं ने
Monday, 24 March 2008
पति ने पैर नहीं धोए, पत्नी ने जला डाला
चीन में एक नव विवाहिता ने नशे की हालत में अपने पति को सिर्फ इसलिए आग के हवाले कर मार डाला क्योंकि वह बिना पैर धोये बिस्तर पर चला गया। समाचार एजेंसी शिंहुआ के अनुसार हुबेई प्रांत के नवदंपत्ति वांग और लू ने गत दो फरवरी को ही शादी की थी और शादी के बाद से इनमें जबरदस्त नोंकझोंक शुरू हो गई थी। इतना ही नहीं हनीमून के दौरान भी इनके लड़ने की शिकायतें प्रशासन को मिली।गत चार मार्च को पति पत्नी के बीच हुए झगड़े से उत्पन्न तनाव को दूर करने के लिए दोनों ने जमकर शराब पी ली। रात को 10 बजे नशे में धुत पत्नी ने देखा कि पति बिना पैर धोये बिस्तर पर सो रहा है। फिर क्या था, यह देखकर पत्नी गुस्से में इतनी आगबबूला हो गई कि उसने सोते पति के बिस्तर में आग लगा दी।
आग के कारण नींद खुलने पर पति वांग उठा और फिर पत्नी से लड़ने लगा लेकिन नशे की वजह से जलते बिस्तर में ही गिर गया और हमेशा के लिए सो गया। पत्नी उसे जलता छोड़ दूसरे कमरे में चली गयी और फिलहाल पुलिस की हिरासत में है।
Sunday, 23 March 2008
दुखी शादीशुदा जीवन से बेहतर है कुंवारापन!
अध्ययन के मुताबिक, शादीशुदा जिंदगी आपके ब्लड प्रेशर के लिए अच्छी तभी हो सकती है, जब आप इससे खुश हों। ‘डेली मेल’ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 204 शादीशुदा और 99 वयस्क कुंवारों का अनिश्चित अंतराल में दिन-रात का ब्लड प्रेशर नापा। इससे पता चला कि असंतुष्ट वैवाहिक जीवन जी रहे जोड़ों का ब्लड प्रेशर अनियमित होता है। ऐसे दंपतियों का ब्लड प्रेशर रात के समय अधिक हो जाता है, जो बाद में दिल की बीमारी का कारण भी बन जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, दूसरी ओर अकेले जिंदगी गुजारने वालों का ब्लड प्रेशर सुखी दंपतियों की तुलना में अधिक होता है।
उटाह की ब्रिंघम यंग यूनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि संतुष्ट वैवाहिक जीवन जी रहे दंपति अक्सर एक-दूसरे को डॉक्टर को दिखाते रहने या फिर स्वस्थ आहार लेने को प्रेरित करते हैं। वे तनाव के पलों में एक-दूसरे को भावनात्मक सहयोग भी देते हैं, जबकि ये चीजें तनावपूर्ण दांपत्य जीवन में या कुंवारों को उपलब्ध नहीं हो पातीं।
Thursday, 20 March 2008
यादें, याद आती हैं
एक साल से ज्यादा समय हो गया जब इयान और उनकी बीवी पांच साल साथ रहने के बाद अलग हुए। लेकिन वे मानते है कि आज भी उनकी जिंदगी की हर चीज, यहां तक कि फर्नीचर भी उन्हें उस रिश्ते की याद दिलाते हैं। इसलिए उन्होंने अपना सबकुछ ऑनलाइन सेल के लिए रख दिया है। इयान के शब्दों में, 'जिस दिन यह सब बिक जाएगा, मैं घर से सिर्फ एक पर्स और पासपोर्ट लेकर निकल जाऊंगा।'सेल में उनका पर्थ में स्थित तीन बेडरूम वाला घर और उसके भीतर रखी सारी चीजें यहां तक कि कार, मोटरसाइकल, जेट स्की और पैराशूटिंग गियर भी होगा। सेल के मुताबिक वे अपने दोस्तों से एक बार परिचय कराकर, अपने जॉब पर ट्रायल का मौका देकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करने दुनिया की सैर पर निकल जाएंगे, जिसमें इंग्लैंड में रह रही अपनी मां से मिलना भी शामिल है।
समाचार को यहाँ देखा जा सकता है। अगर आप भी बोली लगाना चाहते हैं तो उनकी वेबसाईट पर जाएँ.
Monday, 17 March 2008
इंटरनेट से तलाक मान्य नहीं
मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने ईमेल, एसएमएस, फोन और इंटरनेट से होने वाले तलाक को भी मानने से इनकार किया है तथा कहा है कि अब तलाक के लिए पति और पत्नी को तीन माह का समय दिया जाएगा कि वे इस बीच अपने विवाद खत्म कर लें। यदि इस अवधि में भी विवाद खत्म नहीं होता तो ही तलाक होना माना जाएगा। इन तीन महीने के दौरान पति- पत्नी साथ रहेंगे।ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि इस नए निकाहनामे में महिला और पुरुष को बराबर के अधिकार दिए गए हैं। निकाह के साथ ही एक फार्म भी भरा जाएगा जो मैरेज ब्यूरो में जमा होगा तथा इस पर पति-पत्नी और काजी के हस्ताक्षर होंगे। किसी तरह का विवाद होने पर यह एक कानूनी दस्तावेज होगा।
ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाईस्ता अम्बर ने कहा कि यह ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जारी किए गए मॉडल निकाहनामे से पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि कुरान में भी महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि मॉडल निकाहनामा उर्दू में है, जबकि इस नए निकाहनामे को उर्दू के साथ हिन्दी में भी जारी किया गया है, ताकि यह सामान्य लोगों की समझ में आ सके या वैसी मुस्लिम महिलाओं को भी जानकारी हो सके, जिन्होंने उर्दू की शिक्षा नहीं ली है।
नए निकाहनामे में शरीयत के हिसाब से शौहर और पत्नी के लिए निकाह के वास्ते ।7 हिदायतें दी गई हैं तथा 8 हिदायतें तलाक के लिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हिदायत जबरन शादी को लेकर है। शरीयत कानून के हिसाब से जबरन शादी को मान्यता नहीं दी गई है। निकाह दोनों पक्षों के अलावा पति और पत्नी की आपसी सहमति से बेहतर भविष्य के लिए है।
Wednesday, 12 March 2008
पत्नी की डांट ने बनाया नपुंसक
भई एक ख़बर आयी है, विश्लेषण आप ही करें, बेहतर होगा। इटली के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी पर एक लाख 40 हजार पॉन्ड का दावा ठोंका है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी उसे हमेशा डांटती रहती है। इस डांट-फटकार के चलते उसे तनाव हो गया और इस गहरे तनाव ने उसे नपुंसक बना दिया।इस व्यक्ति ने कोर्ट में कुछ ऐसे दस्तावेज पेश किए हैं, जो यह साबित करते हैं कि पत्नी की हर वक्त की फटकार और शिकायतों के चलते ही वह नपुंसक हो।
(बस इतनी ही ख़बर मिल पायी है, आगे क्या हुया, ढूंढ रहा हूँ।)
Saturday, 8 March 2008
पति-पत्नी के बीच दरार किसने डाली!?
बिस्तर पर पहुंचते ही जिंदगी का एक चक्कर पूरा हो जाता है। दिन भर की थकान और नींद के बीच डूबते उतराते हैं कल के सपने और योजनाएं और अगर शादीशुदा लोगों की बात करें तो ये सिर्फ बेड शेयर करने का मामला ही नहीं है। ब्रिटेन में रिसर्चरों ने पता लगाया है कि हाई टेक गैजेट्स की वजह से लाखों कपल अपना बेड अलग करने के लिए मजबूर हैं। 'स्लीप काउंसिल' से जुड़ी जेसिका ऐलेक्जेंडर के मुताबिक स्टडी से साबित हुआ है कि बेडरूम अब सोने की जगह नहीं रह गया। जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे टीवी, फोन और कंप्यूटर की घुसपैठ के कारण बेडरूम कम्यूनिकेशन हब में तब्दील हो गए हैं।आंख खोलने वाली इस स्टडी के लिए ब्रिटेन में 1,400 लोगों के बीच स्टडी की गई। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि 10 फीसदी लोग हर रात अलग बिस्तर पर सोते हैं, 25 फीसदी अकसर अलग बिस्तर पर सोते हैं और 40 फीसदी लोगों का उनके पार्टनर के साथ सोने का टाइम मैच नहीं करता।
बीबीसी की ख़बर में बताया गया है कि तकरीबन हर बेडरूम में गैजेट के नाम पर तकिए के नीचे या साइड टेबल पर मोबाइल फोन निश्चित होता है। लगभग 22 फीसदी लोग अलार्म क्लॉक की जगह मोबाइल फोन के जरिए अपनी गुड मॉर्निंग करते हैं। एक तिहाई लोग बिस्तर पर लेटने के बाद फोन पर बात करने मेसेज भेजने या चैट करने में मशगूल रहते हैं। 20 फीसदी लोग तो बेड पर पहुंचने के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट खंगालने, कंप्यूटर गेम खेलने या कान में हेडफोन लगाकर गाना सुनने में मशगूल रहते हैं। सोने से पहले भगवान की प्रार्थना करने वाले जहां 10 फीसदी हैं, वहीं रिलैक्स करने से ठीक पहले गैजेट्स को चार्जिंग पर लगाने वाले 22 फीसदी। सोने से ठीक पहले कुछ न पीने की सलाह शायद ही किसी के पल्ले पड़ती हो। हर तीसरा आदमी सोने से पहले पानी पीता है। ऐसे भी लोग हैं जो सोने से पहले नींद भगाने वाली कॉफी का सेवन कर लेते हैं। बेड पर पसरकर शराब या शर्बत पीने वालों की भी कमी नहीं है।
जमाने के जेट की रफ्तार से बदलने के बावजूद कुछ चीजें अब भी नहीं बदली हैं। ज्यादातर महिलाओं के लिए पाजामा अब भी सोते समय पहना जाने वाला पसंदीदा और आरामदायक परिधान है। कपड़ों की ही बात करें तो कुछ अजीबोगरीब तथ्यों से भी सामना होता है। महिलाओं के मुकाबले लगभग दोगुने अनुपात में पुरुष सोते समय कोई भी कपड़ा पहनना पसंद नहीं करते। एक फीसदी पुरुषों का तो ये भी दावा है कि वे नाइटी पहनकर सोते हैं।
रिसर्चरों का दावा है कि उनकी स्टडी आज की टेक लाइफ के बेडरूम इफेक्ट का असली असर लोगों के सामने पेश कर रही है। बहरहाल, अब वक्त आ गया है, जब बेडरूम को सिर्फ सोने का कमरा बना रहने दिया जाए और जिंदगी की भागदौड़ को बाहर कर दरवाजा बंद कर लिया जाए ताकि नाइट गुड हो सके।