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Saturday, 8 March 2008

पति-पत्नी के बीच दरार किसने डाली!?

बिस्तर कभी पति-पत्नी के बीच की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का काम करता है, तो कभी जिंदगी अपने दोनों पहियों के सहारे सरपट दौड़ती है। लेकिन अब पति-पत्नी के बीच किसी तीसरे ने घुसपैठ कर ली है। नतीजा- कभी सोने के घंटे अलग, तो कभी बिस्तर अलग। पता चला है कि हमारे पसंदीदा गैजेट्स मसलन टीवी, ऑडियो सिस्टम और कंप्यूटर ही बिस्तर बांटने के लिए जिम्मेदार हैं। दिलचस्प बात ये है कि रिश्तों में दरार डालने वाले इस घुसपैठिए को हम बड़े शौक से अपनी गाढ़ी कमाई खर्च कर घर लाते हैं।

बिस्तर पर पहुंचते ही जिंदगी का एक चक्कर पूरा हो जाता है। दिन भर की थकान और नींद के बीच डूबते उतराते हैं कल के सपने और योजनाएं और अगर शादीशुदा लोगों की बात करें तो ये सिर्फ बेड शेयर करने का मामला ही नहीं है। ब्रिटेन में रिसर्चरों ने पता लगाया है कि हाई टेक गैजेट्स की वजह से लाखों कपल अपना बेड अलग करने के लिए मजबूर हैं। 'स्लीप काउंसिल' से जुड़ी जेसिका ऐलेक्जेंडर के मुताबिक स्टडी से साबित हुआ है कि बेडरूम अब सोने की जगह नहीं रह गया। जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे टीवी, फोन और कंप्यूटर की घुसपैठ के कारण बेडरूम कम्यूनिकेशन हब में तब्दील हो गए हैं।

आंख खोलने वाली इस स्टडी के लिए ब्रिटेन में 1,400 लोगों के बीच स्टडी की गई। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि 10 फीसदी लोग हर रात अलग बिस्तर पर सोते हैं, 25 फीसदी अकसर अलग बिस्तर पर सोते हैं और 40 फीसदी लोगों का उनके पार्टनर के साथ सोने का टाइम मैच नहीं करता।

बीबीसी की ख़बर में बताया गया है कि तकरीबन हर बेडरूम में गैजेट के नाम पर तकिए के नीचे या साइड टेबल पर मोबाइल फोन निश्चित होता है। लगभग 22 फीसदी लोग अलार्म क्लॉक की जगह मोबाइल फोन के जरिए अपनी गुड मॉर्निंग करते हैं। एक तिहाई लोग बिस्तर पर लेटने के बाद फोन पर बात करने मेसेज भेजने या चैट करने में मशगूल रहते हैं। 20 फीसदी लोग तो बेड पर पहुंचने के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट खंगालने, कंप्यूटर गेम खेलने या कान में हेडफोन लगाकर गाना सुनने में मशगूल रहते हैं। सोने से पहले भगवान की प्रार्थना करने वाले जहां 10 फीसदी हैं, वहीं रिलैक्स करने से ठीक पहले गैजेट्स को चार्जिंग पर लगाने वाले 22 फीसदी। सोने से ठीक पहले कुछ न पीने की सलाह शायद ही किसी के पल्ले पड़ती हो। हर तीसरा आदमी सोने से पहले पानी पीता है। ऐसे भी लोग हैं जो सोने से पहले नींद भगाने वाली कॉफी का सेवन कर लेते हैं। बेड पर पसरकर शराब या शर्बत पीने वालों की भी कमी नहीं है।

जमाने के जेट की रफ्तार से बदलने के बावजूद कुछ चीजें अब भी नहीं बदली हैं। ज्यादातर महिलाओं के लिए पाजामा अब भी सोते समय पहना जाने वाला पसंदीदा और आरामदायक परिधान है। कपड़ों की ही बात करें तो कुछ अजीबोगरीब तथ्यों से भी सामना होता है। महिलाओं के मुकाबले लगभग दोगुने अनुपात में पुरुष सोते समय कोई भी कपड़ा पहनना पसंद नहीं करते। एक फीसदी पुरुषों का तो ये भी दावा है कि वे नाइटी पहनकर सोते हैं।

रिसर्चरों का दावा है कि उनकी स्टडी आज की टेक लाइफ के बेडरूम इफेक्ट का असली असर लोगों के सामने पेश कर रही है। बहरहाल, अब वक्त आ गया है, जब बेडरूम को सिर्फ सोने का कमरा बना रहने दिया जाए और जिंदगी की भागदौड़ को बाहर कर दरवाजा बंद कर लिया जाए ताकि नाइट गुड हो सके।

Tuesday, 4 March 2008

पत्नी को 1,24000 गुलाब देगा कंजूस पति!

ईरानी कोर्ट ने एक व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह अपनी पत्नी को 1,24,000 गुलाब खरीद कर दे। कंजूस पति से परेशान पत्नी ने अपने पति से यह मांग दहेज वापसी के तौर पर की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हेंगामेह ने शादी के 10 सालों के बाद अपने कंजूस पति को सबक सिखाने के लिए यह अनोखी तरकीब खोजी। उसने कहा- शादी के कुछ समय के बाद ही मुझे पता चल गया था कि शाहीन बहुत घटिया इंसान है। अगर हम कभी किसी कैफे या रेस्तरां में जाते थे तो वह मेरी कॉफी तक के पैसे नहीं चुकाता था।

वहीं शाहीन का कहना था कि वह हर रोज केवल पांच गुलाब खरीदने का बोझ उठा सकता है। उसने जज से शिकायत की उसकी पत्नी के दिमाग में यह ख्याल उसकी अमीर दोस्त ने डाला है। इस बीच कोर्ट ने 1,24,000 गुलाब देने तक शाहीन का 25,84,960 रुपयों की कीमत वाला फ्लैट जब्त कर लिया है। गौरतलब है कि ईरान में एक लाल गुलाब की कीमत लगभग 81 रुपये है। ईरानी कानून के तहत कोई भी महिला अपना दहेज या महर वापस मांग सकती है। महर को निकाह के वक्त उसका शौहर इस शर्त पर स्वीकार करता है कि तलाक होने पर या शादीशुदा जिंदगी में कभी भी पत्नी के मांगे जाने पर वह उसे वापस कर देगा। ईरान में सोने के सिक्के या प्रॉपर्टी को महर के रूप में देने का चलन है। उल्लेखनीय है कि ईरान में पुरुषों को महर न लौटा पाने स्थिति में जेल तक हो सकती है।

Saturday, 16 February 2008

प्यार के आगे कोमा भी हारा

पहले तो मुझे लगा कि इस ब्लॉग के शीर्षक में एक शब्द और जोड़ दूँ - 'प्रेम' या 'प्यार', फिर लगा कि नहीं जिस ख़बर की चर्चा करने जा रहा हों, वह बिरली ही सामने आ पाती हैं।

कहते हैं कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती। लेकिन बात अगर कॉलेज के दिन हुए प्यार की हो, तो लोग अक्सर इसे संजीदगी से नहीं लेते। अक्सर कॉलेज के दिनों के प्यार को बचकाना और दिल बहलाना का जरिया माना जाता है। लेकिन 23 वर्षीय सनी पवार के लिए जिन्दगी का दूसरा पर्याय ही प्यार बन चुका है।

दरअसल, सनी की प्रेमिका आरती मकवान डेढ़ साल पहले गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गई थी और तब से कोमा (बेहोशी की नींद) में है। सनी कहते हैं कि आरती ढाई साल पहले एक आत्मनिर्भर और खुशमिजाज वाली लड़की थी, लेकिन आज आरती को 24 घंटे देखभाल की जरूरत है।

सनी कहते हैं कि, “मैंने आरती के साथ दुर्घटना के पहले सवा साल और बाद में सवा साल बिताए हैं। पहले के 15 महीनों में आरती के साथ गुजारे गए वक्त ने आज मुझे इतनी प्रेरणा और उसकी देखभाल करने की हिम्मत दी है”।

सनी दुर्घटना के पहले पढ़ाई करता था लेकिन आरती की देखभाल के लिए उसने पढ़ाई भी छोड़ दी। उसके खान-पान की देखभाल से लेकर रोजमर्रा की जरुरतों का ख्याल रखने वाला सनी फुर्सत के क्षणों में उसके साथ बातें भी करता है।

आरती की मां भारती मकवान एक आम प्रेमी से काफी आगे निकल चुके इस लड़के की कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना पर अचंभित हैं।

भारती कहती हैं कि, “वह हमारे घर का पुरुष सदस्य है और शादी से पहले ही मेरी बेटी का भरपूर ख्याल रख रहा है। सनी उसका प्रेमी ही नहीं, बल्कि पिता भी है”।

इन दिनों वित्तीय संकट और गहरे तनाव से गुजर रहा सनी आरती के बिस्तर के सामने की दीवार पर कविताएं और सकारात्मक संदेश लिखे हुए पन्ने चिपकाता रहता है।

भले ही यह जोड़ा शादीशुदा नहीं हो, लेकिन इतने विषम परिस्थितियों के बावजूद एक दूसरे का साथ दे रहा है। आरती के प्रति सनी की भावनाएं और सेवा भाव ने यह साबित कर दिया है कि प्रेम में प्रतिदान नहीं होता।

Tuesday, 12 February 2008

मिल सकता है तलाक, 'पाप' की आशंका पर

महिला के पक्ष में जारी एक फतवे में कहा गया है कि यदि कोई शख्स अपनी पत्नी के साथ नहीं रह रहा है और पत्नी को लगता है कि अपनी स्वाभाविक जरूरतों के लिए मैं 'पाप' में घिर सकती हूं, तो वह तलाक यानी 'खुला' ले सकती है।

भारत की विख्यात इस्लामी संस्था दारुल उलूम देवबंद की फतवा जारी करने वाली इकाई दारुल इफ्ता ने हाल ही में एक महिला की फरियाद पर यह फतवा जारी किया है। केरल की रहने वाली इस महिला की शादी वहीं के व्यक्ति से हुई जो दुबई में कार्यरत है। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ ही दिन बाद पति और उसके घर वाले उसे पीटने और कई तरह के दुर्व्यवहार करने लगे। पत्नी ने इस पर तलाक की मांग की तो वह दुबई भाग गया।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, बरसों से बेबस जिंदगी जी रही इस महिला ने पिछले महीने दारुल इफ्ता में गुहार लगा कर पूछा कि विदेश भाग गए जालिम पति से कैसे छुटकारा पाकर नया जीवन शुरू करे। दारुल इफ्ता ने इस पर दिए फतवे में कहा कि किसी महिला को 2 परिस्थितियों में निकाहनामे को रद्द कर पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक देने पर बाध्य करने का अधिकार है। पहला यह कि अगर पति अपनी पत्नी को जीवन यापन का खर्चा नहीं देता है और दूसरा यह कि यदि पत्नी को यह डर महसूस होता हो कि पति के दूर रहने से वह अपनी स्वाभाविक शारीरिक जरूरतों के लिए ''पाप'' में घिर सकती है। पति से 'खुला' लेने या उसे तलाक के लिए मजबूर करने के लिए ये 2 कारण ही काफी हैं।

'खुला' और तलाक में मुख्य अंतर यह है कि तलाक देने पर पुरुष को उसे गुजारा भत्ता देना होगा जबकि 'खुला' में वह इसके बाध्य नहीं है क्योंकि पत्नी संबंध विच्छेद के लिए पहल करती है। फतवे में कहा गया कि ऐसी सूरत में दूर रह रहा पति यदि तलाक देने से कतरा रहा हो तो पत्नी अपना मामला शरिया पंचायत में ले जा सकती है। पंचायत शिकायत सही पाने पर पति को तलाक देने के लिए बाध्य कर सकती है। इस पर भी यदि वह ऐसा नहीं करता है तो शरिया पंचायत 'मलिकी मसलक' के तहत निकाह को रद्द कर महिला को पति से मुक्ति दिला सकती है।

Monday, 28 January 2008

जनम जनम के फेरों में सात वचन

हर वह चीज, जो किसी के द्वारा सामने लायी जाती है, किसी न किसी को अवश्य मालूम रहती है। अब जैसे कि हिन्दू विवाह संस्कार में वर-वधू द्वारा लिए गए वचन, जो मुझे किसी लेख में मिले और जिन्हें यहाँ लिख रहा हूँ, बहुतेरों को मालूम होंगें लेकिन फिर भी कोई तो होगा ...

वर से लिए गए वचन
  1. ग़ृहस्थ जीवन में सुख-दुःख की स्थितियां आती रहती हैं, लेकिन तुम हमेशा अपना स्वभाव मधुर रखोगे।
  2. मुझे बताये बिना कुआँ - बावड़ी - तालाब का निर्माण, यज्ञ-महोत्सव का आयोजन और यात्रा नहीं करोगे।
  3. मेरे व्रत, दान और धर्म कार्यों में रोक-टोक नहीं करोगे।
  4. मेहनत से जो कुछ भी अर्जित करो, मुझे सौंपोगे।
  5. मेरी राय के बिना कोई भी चल-अचल सम्पति का क्रय-विक्रय नहीं करोगे।
  6. घर की सभी कीमती चीजें, गहने, आभूषण मुझे रखने के लिए दोगे।
  7. माता-पिता के किसी आयोजन में मेरे जाने पर आपत्ति नहीं करोगे।
वधु से लिए गए वचन
  1. मेरी अनुपस्थिति में कहीं नहीं जायोगी।
  2. विष्णु, वैश्वानर, ब्राह्मण, मेहमान और परिजन सभी साक्षी हैं कि मैं तुम्हारा हो चुका हूँ।
  3. मेरे मन में तुम्हारा मन रहे। तुम्हारी बातों में मेरी बातें रहें और मुझे अपने ह्रदय में रखोगी
  4. मेरी इच्छायोँ और आज्ञायोँ का निरादर नहीं करोगी और बडों का सम्मान करोगी।
  5. हमेशा मेरी विश्वसनीय बनी रहोगी।
इसे बहुत पहले लिख तो लिया था मैंने, फिर भी डर रहा था कि कहीं यह बेहद सामान्य सी चीज ना हो। लेकिन मैंने कई 'पंडितों' से भी पूछा , एकाध वचन को छोड़, कोई नहीं बता पाया।

Wednesday, 23 January 2008

जीवनसाथी से नोकझोंक भी जरूरी

अपने जीवन साथी के प्रति गुस्से का इजहार और उसका समाधान ढूंढ निकालने वाले लोगों की अपेक्षा उन दंपतियों की उम्र छोटी होती है जो अपने गुस्से को दबा देते हैं। इस नतीजे पर पहुंचे हैं मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता। पिछले 17 वर्षो के दौरान शोधकर्ताओं की टीम ने 192 दंपतियों पर नजर रखी। इन दंपतियों को चार श्रेणियों में बांटा। पहली श्रेणी में ऐसे पति-पत्नी को शामिल किया गया जो एक-दूसरे के प्रति गुस्से का इजहार कर दिया करते थे। दूसरी व तीसरी श्रेणी में उन पति-पत्नी को रखा गया, जिनमें कोई एक अपना गुस्सा खोल देता था और दूसरा दबाए रखता था। चौथी श्रेणी में उन पति-पत्नियों को रखा गया जो अपने गुस्से और विचारों को जाहिर करते ही नहीं थे।

इस संबंध में प्रमुख शोधकर्ता अर्नेस्ट हारबर्ग के मुताबिक उनकी टीम का अध्ययन बताता है कि गुस्से को दबाने वाले दंपतियों के मुकाबले एक-दूसरे पर गुस्सा जाहिर करने और सुलह की राह अख्तियार करने वाले दंपति ज्यादा दीर्घजीवी होते हैं। वैसे तो कोई भी इसके लिए प्रशिक्षित नहीं होता, लेकिन जिनके माता-पिता अच्छे होते हैं, वे उनकी अच्छाइयों का अनुकरण कर इस रास्ते को अख्तियार कर सकते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है कि मनमुटाव किस दौर में हुआ और आपने कैसे उसे सुलझा लिया गया।

हारबर्ग के मुताबिक जब हमारे सामने समाधान का रास्ता नहीं होता तो अपने गुस्से को दबा लेते हैं। अपनी बात नहीं रखते, यहीं से शुरुआत होती है समस्या की। अध्ययन में शामिल 192 दंपतियों में 26 ऐसे थे, जो अपने उबलते गुस्से को अंदर ही अंदर दबा देते थे, इस समूह में 13 की अध्ययन के दौरान ही मौत हो गई। शेष बचे 166 दंपतियों में 41 की मौत मिश्रित रही। यानी किसी की पत्नी किसी का पति। हारबर्ग के मुताबिक अध्ययन में धूम्रपान, वजन, ब्लड प्रेशर, श्वास और दिल की बीमारियों जैसे कारकों को भी समायोजित किया गया है।

Sunday, 20 January 2008

वश में हो, तो तलाक ले लेंगी ज्यादातर महिलाएं

मेरे ख्याल से यह स्थिति तो हर जगह होगी जैसी ब्रिटेन में पायी गयी है, जहाँ ज्यादातर शादीशुदा ब्रिटिश महिलाओं का वश चले तो वे अपने पति से तलाक लेना पसंद करेंगी। एक सर्वे में यह बात सामने आई है।

शादीशुदा पुरुषों और महिलाओं पर सर्वे में 59 फीसदी महिलाओं ने कहा कि अगर भविष्य में आर्थिक सुरक्षा तय हो, तो तुरंत तलाक ले लेंगी। महिलाओं और पुरुषों दोनों में 10 में से एक का कहना था कि काश मैंने किसी और से शादी की होती। सर्वे के मुताबिक, आधे से ज्यादा पति अपनी शादीशुदा जिंदगी में प्यार का अभाव मानते हैं।

इस सर्वे में 2000 वयस्क ब्रिटिश शामिल किए गए। इनमें करीब 30 फीसदी ने अपनी शादी को नाकाम माना और कहा कि अचानक जिंदगी में उथल-पुथल से बचने के लिए शादी के बंधन को निभा रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों में करीब आधे ने कहा कि परिवार को बिखरने से बचाने के लिए हम साथ रह रहे हैं। 30 फीसदी पुरुषों का कहना था कि हम अपने बच्चों की खातिर साथ रह रहे हैं। 56 फीसदी लोगों ने माना कि अपने वैवाहिक रिश्तों से पूरी तरह खुश नहीं हैं। आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि हमने तलाक लेने पर विचार किया था।