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Sunday, 13 January 2008

टीवी देखने से रोकने पर पिटे पतिदेव

मीरापुर बसहीं (शिवपुर), उत्तर प्रदेश में एक पति द्वारा अपनी पत्नी को टीवी देखने से रोकने पर ११ जनवरी की देर रात बवाल हो गया। बात इतनी बढ़ी कि पति घर छोड़कर भाग गया

बताया जाता है कि पति पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है। वह शुक्रवार की रात तकरीबन बारह बजे घर आया। उस समय पत्‍‌नी टीवी देख रही थी। काफी रात होने के बाद पति ने कई बार कहा कि टीवी बंद कर दो। सुबह काम पर जाना है। पत्‍‌नी ने उसकी बातों को अनसुनी कर दिया। देर रात झल्लाए पति ने टीवी बंद कर दिया। मामला 'रात' में ही बिगड़ गया। टीवी बंद होते ही पत्नी ने आव देखा न ताव, एक थप्पड़ पति को जड़ दिया। इससे स्तब्ध पति ने भी अपना गुस्सा निकाला। इस पर आपे से बाहर हो चुकी पत्‍‌नी ने अपने मायके फोन कर सारी बात बताई। रातोरात मायके से एक दर्जन लोग आ गए।

बात बढ़ती देखकर पति घर से फरार हो गया। मामला रात में ही पुलिस के यहां पहुंच गया। मायकेवाले शनिवार को सवेरे अपनी बेटी को पहले पुलिस चौकी पर लाए और दहेज उत्पीड़न के संबंध में एक प्रार्थनापत्र दे दिया। फिर बेटी को लेकर मीरजापुर चले गये। युवती के मां-पिता का कहना है कि बेटी को सताया जा रहा है। पति पक्ष के अनुसार मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की शादी 26 अप्रैल 2007 को हुई थी।

Thursday, 13 December 2007

पत्नी कैसे बदलती है ...

शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है, जरा गौर कीजिए...

पहले साल: मैंने कहा जी खाना खा लीजिए, आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं .
दूसरे साल: जी खाना तैयार है, लगा दूं ?
तीसरे साल: खाना बन चुका है, जब खाना हो तब बता देना.
चौथे साल: खाना बनाकर रख दिया है, मैं बाजार जा रही हूं, खुद ही निकालकर खा लेना.
पांचवे साल: मैं कहती हूं आज मुझसे खाना नहीं बनेगा, होटल से ले आओ.
छठे साल: जब देखो खाना, खाना और खाना, अभी सुबह ही तो खाया था ...

Monday, 10 December 2007

बदमिजाज पतियों की पिटाई का फतवा!

हालांकि यह खबर एसोसिएटेड प्रेस के सौजन्य से करीब दस दिन पहले इसी ब्लॉग में दी गयी थी। अब जाकर नवभारत टाइम्स में इस फतवे की खबर आयी है. यहाँ देखें कि किस तरह लेबनान के जानेमाने धर्मगुरू ने यह फतवा जारी किया है कि अगर पति अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता है, तो पत्नी भी अपनी सुरक्षा के लिए पति पर हाथ उठा सकती है।
पूर्व प्रकाशित ब्लॉग

Wednesday, 5 December 2007

पापा परिवार का हिस्सा नहीं !

कहते हैं बच्चों के लिए माता-पिता ही भगवान का एक रुप होते हैं। बच्चों को जहां मां का दुलार चाहिए वहीं पिता के प्यार और सहारे की भी जरुरत होती है।

लेकिन इससे उलट लंदन में किए गए एक सर्वेक्षण में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि चार में से एक बच्चा अपने पिता को परिवार का हिस्सा नहीं मानता।

सर्वेक्षण के अनुसार ब्रिटेन में बच्चे अपनी मां को तो जानते हैं लेकिन पिता इस सुख से कोसों दूर हैं। तकरीबन 96 प्रतिशत बच्चे अपनी मां को मौजूदा परिवार का प्रमुख हिस्सा मानते हैं, जबकि 26 प्रतिशत बच्चे पिता को परिवार का अंग भी नहीं मानते।

'वार्ता' की खबर में दिए गए सर्वेक्षण की मानें तो एक-चौथाई बच्चों को अपने पिता की पारिवारिक भूमिका के बारे में कुछ पता ही नहीं हैं। यह सर्वेक्षण छह से 12 साल तक की उम्र वाले बच्चों पर किया गया था।

Monday, 3 December 2007

तलाक और पर्यावरण!

एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि तलाक के बढ़ते मामले वैश्विक गर्माहट (ग्लोबल वार्मिंग) को बढ़ाते हैं।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को अध्ययन में पता चला है कि तलाक के बाद महिला घर छोड़कर एक नई गृहस्थी बसाने की तरफ बढ़ती है। लेकिन इसके बाद वह प्राकृतिक संसाधनों का कार्यकुशलता के साथ उपयोग नहीं करती। इसके साथ ही भूमि, आवास और घरेलू उपयोगी सामानों पर खर्च बढ़ जाता है।

‘न्यूज ऑस्ट्रेलिया’ के ऑनलाइन संस्करण के हवाले से बताया गया कि शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 2001 और 2005 के बीच 3,283 घरों का सर्वेक्षण किया।

सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने पाया कि तलाक के बाद गृहस्थी उपयोगी चीजों की मांग काफी बढ़ जाती है। गृहस्थ जीवन में जहां कमरे की मांग छह फीसदी की दर बढ़ती है वहीं तलाक के बाद प्रति व्यक्ति कमरे की संख्या में 61 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस की खबर में यह भी कहा गया है कि तलाक के बाद प्रति व्यक्ति कचरा उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी हो जाती है। इन कारकों से पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन पर भी असर पड़ता है और जैव विविधता भी प्रभावित होती है।

Saturday, 1 December 2007

टीवी शो गोरों को सिखा रहा अरेंज मैरिज के फायदे

ब्रिटेन का एक नया टीवी शो गोरे अंग्रेजों को बता रहा है कि किस तरह अरेंज मैरिज से उनकी जिंदगी की तमाम झंझटें खत्म हो जाएंगी।

अरेंज मी ए मैरिज शो की एंकर अनीला रहमान 30 साल आयुवर्ग के एकाकी लोगों को लंबे समय तक साथ निभाने वाला साथी खोजने के गुर सिखा रही हैं। एशिया मूल की स्काटलैंड की नागरिक अनीला की शादी 15 साल पहले पारंपरिक ढंग से हुई थी। वह खुद सुखी पारिवारिक जीवन बिता रही हैं।

झंझटों से छुटकारा पाने के लिए वह युवा अंग्रेजों को शराबखाने या डिस्कोबार के चक्कर काटने के प्रचलित नुस्खे बताने की जगह उन्हें अरेंज मैरिज की सलाह दे रही हैं। उनकी युवाओं को सलाह है कि अपना साथी चुनते वक्त उसकी पढ़ाई-लिखाई, पृष्ठभूमि और उसके परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करने पर ध्यान लगाएं।

39 साल की उम्र में भी चुलबुली नजर आने वाली अनीला ने इससे पहले किसी टीवी शो में काम नहीं किया है। उन्होंने बताया कि शो का मकसद लोगों को खुशी देना ही नहीं है, बल्कि ब्रिटेन में एक दूसरी संस्कृतियों को जानने की संस्कृति विकसित करना भी है। अनीला के जीवनसाथी स्काटलैंड से पाकिस्तान चले गए हैं। वह बताती हैं, यह तो जिंदगी का हिस्सा है। हम जिस एशियाई संस्कृति में पले बढ़े हैं यह उसका हिस्सा है। यह ऐसी चीज है जिसके बारे में अक्सर चर्चा होती रहती है।

पारंपरिक शादी ब्रिटेन में विवाद का मुद्दा रहा है। पांच साल पहले कैबिनेट मंत्री डेविड ब्लंकेट ने सुझाव दिया था कि एशियाई परिवार ब्रिटेन के भीतर ही जीवनसाथी खोजें और वर-वधू की खोज में विदेश न जाएं। इस बयान पर काफी हाय तौबा मची थी।

Thursday, 29 November 2007

फतवा : पति को पीट सकती हैं महिलायें !

एक मुस्लिम महिला अपनी हिफाजत के लिए अपने पति द्वारा मारे जाने पर जवाब में पलट कर उसे भी मार सकती है। ये फतवा लेबनान के एक बड़े शिया मौलाना ने मंगलवार को इस्लाम के पुरुष प्रधान समाज में जारी किया है।

एपी की खबर के अनुसार, आयतुल्लाह मोहम्मद हुसैन फदल्लाह ने ये फतवा (या आदेश) महिलाओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर दिया।

फदल्लाह ने अपने फतवे में कहा, “हमारा विचार है कि अगर एक पुरुष महिला के खिलाफ शारीरिक हिंसा करता है, और महिला जवाबी हमला किए बिना अपना बचाव नहीं कर सकती तो वह आत्मरक्षा में ऎसा कर सकती है।”

फदल्लाह ने अपने कार्यालय से जारी एक बयान में जोर देकर कहा है कि यद्यपि इस्लाम पुरुषों को अपने घरेलू मामलों में पत्नियों पर वरीयता देता है लेकिन “यह किसी भी हालत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा- यहां तक की बेइज्जती करने और उन्हें अपशब्द कहने की भी इजाजत नहीं देता। ”

लेबनान में शिया आबादी 12 लाख हैं और उनमें फदल्लाह को धार्मिक मामलों में उच्च स्थान हासिल है। उनके अनुयायी पूरे मध्य- पूर्व इलाके में हैं। पश्चिम उन्हें उनके हिज्बुल्लाह के साथ पूर्व में रहे रिश्तों की वजह से चरमपंथी मानता है। जबकि उन्होंने कई बार कई मुद्दों पर प्रगतिशील और अहिंसा का उदाहरण दिया है जिसकी वजह से उनके कुछ रुढ़िवादी समर्थक अचंभित हो जाते हैं।

फदल्लाह ने कुछ रुढ़िवादी मुस्लिम समाज में व्यभिचार के लिए महिला को जान से मारने की परंपरा की आलोचना की है। उन्होंने ये भी कहा है कि अगर एक आदमी किसी महिला के कानूनी और वैवाहिक अधिकारों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लेता है; जैसे कि वह घर में होनेवाले खर्चे में कटौती करता है,या फिर उससे शारीरिक संबंध रखने से बचता है, ऐसे में “उसके जवाब में पत्नी शादी के अनुबंध में किए गए करार से उसे वंचित कर सकती है। ”

फदल्लाह ने कहा कि पूरे संसार में औरतों को हिंसा का निशाना बनाया जाता है जबकि, “ महिलायें सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर सरकारी और गैर-सरकारी दोनों स्थानों पर बड़े ओहदों पर पहुंच चुकी हैं। ”

उन्होंने जोर देकर कहा कि काम के स्थानों पर और परिवार में महिलाओं के अधिकारों का आदर करना चाहिए।